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नासिक। खरीफ सीजन में रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसानों को हो रही परेशानी के बीच कृषि विभाग ने राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब किसानों को खाद की उपलब्धता जानने के लिए दुकानों और कृषि सेवा केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कृषि विभाग 15 अगस्त से महाराष्ट्र के 12 जिलों में रासायनिक उर्वरकों की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा शुरू करने जा रहा है। इसमें नासिक जिला भी शामिल है।

नई व्यवस्था के तहत किसान मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने घर से ही नजदीकी कृषि सेवा केंद्र पर उपलब्ध उर्वरक का स्टॉक देख सकेंगे। अपनी जरूरत के अनुसार खाद की ऑनलाइन बुकिंग भी की जा सकेगी। बुकिंग होने के बाद किसान को संबंधित केंद्र पर जाकर भुगतान करना होगा और इसके बाद उसे बुक किया गया उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। घर बैठे पता चलेगा खाद का स्टॉक खरीफ सीजन में किसानों के लिए समय पर रासायनिक उर्वरक उपलब्ध होना बेहद जरूरी होता है। कई बार मांग बढ़ने के कारण किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। कुछ मामलों में किसान एक दुकान से दूसरी दुकान तक उपलब्धता की जानकारी लेने के लिए भटकते रहते हैं।

ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था लागू होने के बाद इस समस्या को कम करने की कोशिश की जाएगी। किसान मोबाइल ऐप पर अपने आसपास के कृषि सेवा केंद्रों में उपलब्ध खाद की जानकारी देख सकेंगे। इससे उन्हें पहले से पता रहेगा कि किस केंद्र पर उनकी जरूरत का उर्वरक उपलब्ध है। बुकिंग के बाद तीन दिन तक रिजर्व रहेगा स्टॉक नई व्यवस्था में ऑनलाइन बुकिंग के बाद किसान के लिए खाद का स्टॉक सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संबंधित उर्वरक डीलर की होगी। कृषि विभाग के अनुसार, बुकिंग किए गए उर्वरक को डीलर को तीन दिनों तक किसान के लिए रिजर्व रखना होगा।

अलग-अलग क्षेत्रों में किसानों की जरूरत और रासायनिक उर्वरकों की मांग को देखते हुए इस व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। भविष्य में इसके परिणामों के आधार पर इसे अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की संभावना है। खरीफ सीजन में बढ़ जाती है खाद की मांग महाराष्ट्र में खरीफ मौसम के दौरान बड़ी संख्या में किसान विभिन्न फसलों की खेती करते हैं। बुवाई और फसल की शुरुआती वृद्धि के दौरान रासायनिक उर्वरकों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। किसानों को समय पर उर्वरक नहीं मिलने से खेती का काम प्रभावित हो सकता है। इसी समस्या को देखते हुए कृषि विभाग तकनीक के माध्यम से खाद वितरण को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की कोशिश कर रहा है। किसानों को मिलेगी उपलब्धता की सही जानकारी ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था का एक प्रमुख फायदा यह होगा कि किसान को खाद की उपलब्धता की जानकारी पहले ही मिल सकेगी। इससे अनावश्यक यात्रा और समय की बचत होगी। किसान अपनी जरूरत के मुताबिक नजदीकी केंद्र पर उपलब्ध स्टॉक देखकर बुकिंग कर सकेंगे। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए यह सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि खाद की तलाश में कई किलोमीटर दूर जाने और अलग-अलग दुकानों पर पूछताछ करने की जरूरत कम हो सकती है। डीलरों की जिम्मेदारी भी तय नई व्यवस्था में केवल किसानों को सुविधा देने की बात नहीं है, बल्कि उर्वरक डीलरों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। ऑनलाइन बुकिंग के बाद किसान के नाम पर बुक किए गए स्टॉक को तीन दिनों तक सुरक्षित रखना होगा। इससे वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। किसान द्वारा ऑनलाइन बुकिंग किए जाने के बाद उसके लिए उपलब्ध स्टॉक को लेकर स्पष्टता रहेगी। निर्धारित अवधि में किसान केंद्र पर पहुंचकर भुगतान कर खाद प्राप्त कर सकेगा। पायलट प्रोजेक्ट के बाद बढ़ाया गया दायरा कृषि विभाग ने इस ऑनलाइन व्यवस्था को पहले पायलट आधार पर शुरू किया था। पायलट प्रोजेक्ट के दौरान व्यवस्था की उपयोगिता और संचालन से जुड़े पहलुओं को देखा गया। इसके बाद अब इसे अधिक जिलों में लागू करने का निर्णय लिया गया है। विभाग का उद्देश्य किसानों को उर्वरक की उपलब्धता के लिए पारंपरिक तरीके से निर्भरता कम करना और डिजिटल माध्यम से सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे खाद की मांग और उपलब्ध स्टॉक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। किसानों को राहत की उम्मीद खरीफ सीजन में रासायनिक उर्वरकों की कमी और उपलब्धता को लेकर किसानों के सामने आने वाली परेशानियों के बीच यह नई व्यवस्था राहत देने वाली मानी जा रही है। यदि ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली सुचारु रूप से काम करती है तो किसानों को लंबी कतारों और बार-बार कृषि सेवा केंद्रों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है। 15 अगस्त से नासिक समेत चयनित जिलों में यह सुविधा शुरू होने के बाद किसानों को मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की उपलब्धता और बुकिंग की सुविधा मिलेगी। अब इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कृषि सेवा केंद्रों पर स्टॉक की जानकारी कितनी नियमित रूप से अपडेट होती है और बुकिंग के बाद किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। कृषि विभाग की इस पहल से खाद वितरण व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने और किसानों तक उर्वरक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान करने की उम्मीद है। खरीफ सीजन में किसानों के लिए समय पर खाद उपलब्ध कराने की चुनौती के बीच डिजिटल बुकिंग व्यवस्था एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।


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