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मुंबई: प्याज के भाव को लेकर बाजार में अस्थिरता को देखते हुए किसानों ने टमाटर और बैंगन की खेती शुरू की. अब इनका भाव भी एकदम से गिर गया है. महाराष्ट्र का किसान चारों तरफ विपत्तियों से घिर गया है. अनेक किसानों की नौबत यहां तक आ गई है कि जीने की चाहत नहीं है, मरने की इजाजत नहीं है.

प्याज का भाव एशिया की सबसे बड़ी मंडी लासलगांव में 4000 क्विंटल से गिरकर अचानक 2000 क्विंटल तक आ गया. ऐसा पहली बार नहीं हुआ. बाजार के इस उतार-चढ़ाव से तंग आकर पहले ही कई किसानों ने प्याज की खेती छोड़ दी थी. नासिक जिले में येवला तालुका के एक किसान भारत भावसर उन्हीं में से एक हैं. इन्होंने अपने दो एकड़ खेत में छह हजार बैंगन के पौधे लगाए. इसमें इनके 70 से 80 हजार रुपए खर्च हो गए.

पिछली बार बैंगन की उपज में प्रति कैरेट 450 रुपए का बाजार भाव मिला था. यह सोच कर भारत भावसर ने बैंगन उगाया, लेकिन प्याज की तरह यहां भी धोखा खाया. आज इन्हें अपने बैंगन प्रति कैरेट 50 से 60 रुपए में बेचना पड़ रहे हैं. ऐसे में उत्पादन खर्च तो दूर, ढुलाई और मजदूरी तक का खर्च पूरा करना मुश्किल हो रहा है. हार कर इन्होंने दो एकड़ के बैंगन को जमीन में ही गाड़ कर नष्ट कर दिया.

बैंगन की तरह ही प्याज के भाव में भी भारी गिरावट आई है. जो प्याज नासिक के लासलगांव मंडी में महीने भर पहले 3500 रुपए से 4000 रुपए क्विंटल बिक रहा था, वो अब 2300 से 2000 के भाव में बिक रहा है. सर्दियों में बेमौसम बरसात की वजह से किसानों के प्याज बड़ी मात्रा में सड़ गए थे. आवक कम होने की वजह से प्याज का भाव चढ़ गया था, लेकिन गर्मियों के मौसम में होने वाले प्याज की आवक अब तेजी से शुरू हो गई है.

अचानक इस बढ़ती हुई सप्लाई की वजह से थोक बाजार में प्याज का भाव भी आसमान से जमीन पर आ गिरा है. किसान हर हालत में मर रहा है. जब भाव चढ़ता है तो थोक व्यापारी लाभ उठा ले जाते हैं. जब भाव गिरता है तो किसान अपनी उपज की बिक्री औने-पौने दामों में ही कर पाते हैं.


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