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मुंबई : राकों के दोनों गुटों के विलय को लेकर चल रही चर्चा के बीच पार्थ पवार ने अपना पॉवर प्ले गेम शुरू कर दिया है। शनिवार को शरद पवार को ब्रीच कैंडी अस्पताल से छुट्टी मिल गई। इसके बाद पार्थ, बड़े पवार से मिलने के लिए सिल्वर ओक निवास पहुंचे।

सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे चर्चा हुई। इस दौरान पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे, अनिल देशमुख व जितेंद्र अव्हाड जैसे सीनियर नेता भी मौजूद रहे। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब राकां के दोनों गुटों के विलय की चर्चा अपने चरम पर है।

पटेल-तटकरे की नहीं चलेगी मनमानी

सूत्रों के मुताबिक पार्थ ने विलय को लेकर शरद पवार के सामने जटिल शर्तें रख दी है। उन्होंने साफ तौर से कहा है कि अगर विलय होता है तो पटेल व तटकरे के हाथों में राकां का रिमोट कंट्रोल नहीं होना चाहिए।

दरअसल पूर्व डीसीएम अजीत पवार के निधन के बाद से ही पार्थ को लग रहा है कि ये दोनों सीनियर नेता पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं। यही वजह है कि अजीत पुत्र ने शुरू से पटेल व तटकरे के खिलाफ मोर्चा संभाल रखा है।

प्लानिंग के तहत वकालत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तटकरे एक प्लानिंग के तहत अब विलय की वकालत करने लगे हैं। जिस तरह से पार्थ ने पटेल व तटकरे पर शिकंजा कसा है, इसके बाद उन्हें लग रहा है कि विलय से ही पार्थ के पॉवर को कम किया जा सकता है।

अगर विलय का फैसला होता है तो जाहिर तौर से सीनियर होने के नाते पार्टी की कमान शरद पवार व सुप्रिया सुले के हाथों में चली जाएगी। पार्थ का दबदबा खत्म हो जाएगा और पटेल-तटकरे को राहत मिलेगी।

यह भी कहा जा रहा है कि डीसीएम सुनेत्रा पवार व पार्थ एक योजना के तहत ऐसी शर्तें रख रहे हैं, ताकि विलय का प्रस्ताव खटाई में पड़ जाए। सुनेत्रा व पार्थ को पता है कि विलय के बाद पार्टी में उनकी हैसियत कम हो जाएगी।

फैसला पवार परिवार को लेना है : सीएम

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राकां के दोनों गुटों के विलय को लेकर बड़ा रिएक्शन दिया है। उन्होंने कहा है कि इस बारे में फैसला पवार परिवार (शरद पवार और सुनेत्रा पवार-पार्थ पवार) को लेना है। हालांकि, सीएम ने कहा कि एनडीए के एक घटक दल होने नाते राकां हमसे सलाह-मशविरा कर सकती है।

पवार बीजेपी में शामिल नहीं होंगेः राऊत

शिवसेना उद्धव गुट के प्रवक्त्ता संजय राऊत ने कहा है कि शरद पवार कभी भी बीजेपी में शामिल नहीं होंगे, पवार, विपक्ष के इंडिया गठबंधन का एक मजबूत स्तम्भ हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि सीनियर पवार की प्रोग्रेसिव सोच में कोई बदलाव नहीं आएगा।

राऊत ने कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने शरद पवार को फोन कर कहा है कि वे सुप्रिया सुले के साथ मिलकर देश चलाएंगे। बड़ा सवाल यह है कि अगर देश को मिलकर चलाना था, तो राकां और शिवसेना पार्टी को क्यों तोड़ा गया।


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