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मुंबई : दिशा सालियान मामले में पिता सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने कई गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने दावा किया कि मामले में उद्धव ठाकरे आरोपी हैं, जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस महत्वपूर्ण गवाह हैं। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ किए जाने का आरोप लगाते हुए यह भी दावा किया कि उनकी ओर से सौंपे गए सबूतों के आधार पर सीबीआई आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। नीलेश ओझा ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने अपने बेटे के गलत कामों को छिपाने के लिए पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को दोबारा पुलिस सेवा में बहाल कराया था। सचिन वाझे कस्टोडियल डेथ और उससे जुड़े कवरअप के मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर निलंबित थे और जमानत पर बाहर थे। दिशा सालियान की मौत से दो दिन पहले वाझे को पुलिस सेवा में बहाल किया गया था। नीलेश ओझा ने आरोप लगाया कि वाझे की बहाली अदालत के आदेश के खिलाफ थी। उन्होंने दावा किया कि पूर्व पुलिस अधिकारी परमबीर सिंह ने अपने बयान में कहा था कि उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की ओर से वाझे को बहाल करने का दबाव डाला गया था। ओझा ने इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ओर से पद के कथित दुरुपयोग से भी जोड़ा।

देवेंद्र फडणवीस से उद्धव ठाकरे ने कही थी वह बात

उन्होंने दावा किया कि इस मामले में मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एक महत्वपूर्ण गवाह हैं। नीलेश ओझा के मुताबिक, एंटीलिया मामले में सचिन वाझे की गिरफ्तारी के बाद उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि वह ओसामा बिन लादेन नहीं है। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब उद्धव ठाकरे ने उनसे सचिन वाझे को बहाल करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने अदालत के आदेश का हवाला देते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया था। नीलेश ओझा ने परमबीर सिंह, शैलेंद्र नागरकर, अर्जुन राजाने, सचिन वाझे और आदित्य ठाकरे को लेकर भी कई दावे किए। उन्होंने कहा कि सीबीआई उपलब्ध रिकॉर्ड और सबूतों की जांच करने के बाद इन लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई की तैयारी कर सकती है।

पुलिस ने डीवीआर बैकअप लेने के बाद किया था सील

दिशा सालियान मामले से जुड़ी फुटेज को लेकर ओझा ने आरोप लगाया कि इसके साथ छेड़छाड़ की गई थी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज का डीवीआर बैकअप लेने के बाद सील किया था। उन्होंने दावा किया कि इसके कुछ दिन बाद परमबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि घटना के समय आदित्य ठाकरे सहित अन्य लोग वहां मौजूद नहीं थे। इस पर सवाल उठाते हुए ओझा ने कहा कि अगर सीसीटीवी फुटेज पहले ही सील की जा चुकी थी, तो उसके आधार पर ऐसी जांच कैसे की गई।


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