फडणवीस के नए मिशन की चर्चा, राकांपा में बढ़ी हलचल
मुंबई : महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़े राजनीतिक फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर कहा जा रहा है कि वह अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को लेकर एक नई रणनीति पर काम कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार लक्ष्य किसी गुट को तोड़ना नहीं, बल्कि पूरी पार्टी को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करना हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में हुए बड़े बदलावों के बाद ऐसी अटकलों को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है।
दरअसल, इससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी दोनों ही दलों में बड़ी टूट देखने को मिली थी। शिवसेना में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में अलग गुट बना, जिसने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई। इसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में भी अजित पवार के नेतृत्व में अलग गुट सामने आया और वह सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा बन गया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, महाराष्ट्र में गठबंधन की राजनीति के बीच भाजपा लगातार अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत अब राकांपा को लेकर नए समीकरणों की चर्चा शुरू हुई है।
चर्चा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस बार पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर सकते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रयास किस रूप में सामने आएगा और इसका राजनीतिक असर कितना होगा। महाराष्ट्र की राजनीति में राकांपा का अपना मजबूत आधार रहा है। शरद पवार की पार्टी लंबे समय से राज्य की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाती रही है। वहीं, अजित पवार गुट के अलग होने के बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई है। ऐसे में राकांपा के भविष्य को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं।
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि महाराष्ट्र की राजनीति में किसी भी बड़े बदलाव से पहले कई स्तरों पर बातचीत और समीकरणों को साधना पड़ता है। राकांपा के भीतर भी अलग-अलग नेताओं के अपने राजनीतिक हित हैं, इसलिए किसी भी संभावित कदम को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। विपक्षी दलों की ओर से भी ऐसी चर्चाओं पर नजर रखी जा रही है। विपक्ष का आरोप रहा है कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों और राजनीतिक रणनीतियों के जरिए विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश करती है। वहीं भाजपा लगातार इन आरोपों को खारिज करती रही है और इसे राजनीतिक समर्थन बढ़ाने की प्रक्रिया बताती है। महाराष्ट्र में आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर सभी दलों की नजर बनी हुई है। शिवसेना और राकांपा में हुए बदलावों के बाद राज्य की राजनीति पहले ही नए समीकरणों से गुजर रही है।