मुंबईकरों पर पानी कटौती के बीच नया बोझ... बीएमसी जल्द बढ़ा सकती है जल शुल्क
मुंबई : मुंबईकरों पर जल्द ही पानी शुल्क बढ़ोतरी का बोझ पड़ सकता है। एक ओर शहर में फिलहाल 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू है, वहीं दूसरी बीएमसी जल विभाग पानी शुल्क में 6 से 7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की तैयारी में जुट गया है। पाइप लाइनों की मरम्मत, जल शुद्धिकरण और दूरस्थ बांधों से पानी लाने पर बढ़ते खर्च को देखते हुए प्रशासन ने शुल्क वृद्धि की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस मुद्दे पर बीएमसी आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त स्तर पर चर्चा भी हो चुकी है और अब अंतिम निर्णय मानसून तथा बांधों में जलसंग्रह की स्थिति पर निर्भर माना जा रहा है। पाइपलाइन की मरम्मत, रखरखाव, लीकेज नियंत्रण, पंपिंग स्टेशन संचालन और पानी को शुद्ध बनाने की प्रक्रिया पर लगातार बढ़ते आर्थिक बोझ ने मनपा प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यही कारण है कि पिछले 5 वर्षों से लंबित पानी शुल्क वृद्धि का प्रस्ताव अब फिर से सक्रिय कर दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2020 के बाद से पानी शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। कोरोना महामारी के दौरान मुंबई की आर्थिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जिसके चलते तत्कालीन प्रशासन ने पानी शुल्क न बढ़ाने का फैसला लिया था। इसके बाद वर्ष 2021-22, 2022-23, 2023-24 और वर्ष 2024-25 में भी अलग-अलग कारणों से शुल्क वृद्धि का प्रस्ताव टाल दिया गया। लेकिन अब मनपा प्रशासन का कहना है कि लगातार बढ़ते खर्च और घटते राजस्व के कारण आर्थिक संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। दरअसल, बीएमसी ने पहले वर्ष 2026 में पानी शुल्क में करीब 8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया था। प्रस्ताव को लेकर अतिरिक्त आयुक्त स्तर पर विस्तृत चर्चा भी हुई थी। हालांकि, उस समय राजनीतिक विरोध के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया, महापौर रितू तावड़े ने पदभार संभालने के बाद पानी शुल्क वृद्धि पर रोक लगाने की घोषणा की थी।
लागू करने में जल्दबाजी नहीं
वहीं विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने भी इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया था। इसके बाद स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने सदन में स्पष्ट किया था कि तत्काल पानी शुल्क नहीं बढ़ाया जाएगा और प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया था।
इसके बावजूद अब करीब 15 दिन पहले बीएमसी प्रशासन ने फिर से नया प्रस्ताव तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार इस बार 6 से 7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का विकल्प सामने रखा गया है। हालांकि प्रशासन फिलहाल इसे लागू करने में जल्दबाजी नहीं करना चाहता।
अधिकारियों का मानना है कि जब तक मुंबई को पानी देने वाले सातों बांधों में संतोषजनक जलसंग्रह नहीं हो जाता, तब तक शुल्क वृद्धि लागू करने से नागरिकों में गलत संदेश जा सकता है। खासतौर पर ऐसे समय में जब शहर पहले से पानी कटौती झेल रहा है।
तो मनपा को उठाना पड़ेगा आर्थिक नुकसान
बीएमसी प्रशासन का दावा है कि यदि इस वर्ष भी पानी शुल्क नहीं बढ़ाया गया, तो मनपा को 100 से 125 करोड़ रुपये तक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार सामान्यतः हर वर्ष करीब 8 प्रतिशत तक पानी शुल्क बढ़ाया जाता है ताकि खर्च और आय के बीच संतुलन बना रहे। लेकिन लगातार पांच वर्षों तक शुल्क स्थिर रहने से जल विभाग की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ गया है। अब वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किए गए नए प्रस्ताव पर वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक स्तर पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।