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मुंबई : देश की मायानगरी मुंबई में आगामी 29 अप्रैल को लोकसभा चुनाव की वोटिंग होनी है। इससे पहले मुंबई पुलिस ने ऐसे करीब 5000 हजार आरोपियों की सूची बनाई है, जो गिरफ्तारी के बाद इन दिनों जमानत पर बाहर हैं। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, ‘ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि मुंबई में शांतिपूर्ण मतदान हो सके।’ सूत्रों का कहना है कि जमानत पर चल रहे आरोपियों की संख्या हजारों में है, लेकिन चुनाव के दौरान कुछ खास किस्म के आरोपियों पर ही पुलिस की खास नजर रखती है। चुनाव के दौरान बहुत से राजनेता ऐसे आरोपियों की सेवाएं अपने प्रचार के लिए लेते हैं। 

एहतियात के तौर पर पुलिस करती है कार्रवाई 

एक अधिकारी के अनुसार, ‘ऐसा करना अपराध तो नहीं है, लेकिन दिक्कत तब होती है, जब ये दबंग अपराधी एक राजनेता के कहने पर दूसरे राजनेता या उसके कार्यकर्ताओं को धमकाते हैं। इस संभावित दहशत को खत्म करने के लिए पुलिस जमानत पर छूटे आरोपियों पर एहतियातन कार्रवाई करती है। इसे प्रिवेंटिव अरेस्ट कहा जाता है।’ 

क्या होता है प्रिवेंटिव ऐक्शन 

इसके तहत पुलिस के पास कई ऐसे अधिकार हैं, जिनमें अदालत की इजाजत की जरूरत नहीं पड़ती। जिस आरोपी पर पहले दो या उससे ज्यादा केस दर्ज हों, पुलिस सीआरपीसी के सेक्शन 56 के तहत अधिकतम तीन साल के लिए उसे तड़ीपार कर सकती है। किसी भी तरह के बॉडी ऑफेंस में दो से ज्यादा बार गिरफ्तारी के बाद जमानत पर बाहर आए आरोपी से चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था को खतरा लगे, तो पुलिस कमिश्नर को उसे एमपीडीए के तहत उसे जेल भेजने का अधिकार है।

तीन-चार केसों में सजा काट चुके अपराधी को पुलिस मतदान से पहले सीआरपीसी के सेक्शन 151 (बी) के तहत ऐहतियातन फिर अंदर कर सकती है। भरवाए जाएंगे बांड। पुलिस चुनाव से पहले जमानत पर छूटे बहुत से आरोपियों से सीआरपीसी के सेक्शन 107 और 110 के तहत बांड भरवाती है कि वे चुनाव के दौरान कोई गड़बड़ी नहीं करेंगे। इसके बाद यदि वे किसी असामाजिक गतिविधि में लिप्त पाए गए, तो पुलिस फौरन उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज देती है।

चुनाव आयोग लेता है रिपोर्ट।

चुनाव आयोग मतदान से पहले पुलिस से सुरक्षा इंतजामों पर रिव्यू लेता है।


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