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मुंबई : मुंबई में कोविड-19 से मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है। राज्य सरकार ने बीएमसी से उन मृत लोगों के घरों में जाकर लिस्ट तैयार करने को कहा है जिनके नाम कोरोना वायरस से मौतों के आंकड़ों में शामिल नहीं है। सूत्रों ने बताया कि इस लिस्ट के तैयार होने के बाद कोरोना वायरस के मौतों की संख्या 400 से 500 तक बढ़ सकती है। अभी मुंबई में सोमवार तक इस वायरस से 2250 लोगों की मौत हो चुकी है।

प्रमुख सचिव स्वास्थ्य डॉ. प्रदीप व्यास की ओर से 11 जून को सभी नगर निकायों और जिला प्रशासन को पत्र लिखा है और ये आंकड़े तैयार करने को कहा है। पत्र में मुख्य सचिव अजॉय मेहता की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि यह आंकड़े 15 जून तक एकत्र कर लिए जाएं। इसमें यह भी लिखा है कि अगर कोई डाटा एक-दूसरे से नहीं मिलता है तो उसे गंभीरता से लिया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि कई मामलों में विसंगति होने के कारण यह आंकड़े तैयार करवाए जा रहे हैं।

मुख्य सचिव ने कहा, 'कोविड-19 मरीजों को हमारे सिस्टम में एंट्री थी लेकिन उनके हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने या मरने की एंट्री नहीं है। हो सकता है कि उनकी मौत ह्रदय गति थमने या किन्ही अन्य कारणों से हुई होगी। हालांकि उनकी मौत कोडिव-19 मौत के रेकॉर्ड में आनी चाहिए थी। महामारी ऐक्ट 1897 में साफ है कि अगर बीमारी से पॉजिटिव व्यक्ति की मौत किसी और कारण से भी होती है तो उसका रेकॉर्ड संबंधित बीमारी के रेकॉर्ड में ही दर्ज होना चाहिए। इस तरह के मामले सिर्फ तीन कारणों से ही नहीं दर्ज होते, एक संक्रमित व्यक्ति की मौत जानवर के हमले से हुई हो, हत्या हुई हो या उसने सुइसाइड किया हो।'

अजॉय मेहता ने कहा कि डाटा एकत्र करने का काम अगले 2-3 दिन में पूरा हो जाएगा और उसे सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोई ऐसा कारण नहीं है जिससे आंकड़े छिपाए जाएं। हम चाहते हैं कि इस मामले में सब साफ और सबके सामने रहे। यह सिर्फ हमारे लिए एक सामान्य रेकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि अगर यह पाया गया कि किसी ने जानबूझकर कोरोना वायरस से मौत का आंकड़ा छिपाया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को बीएमसी पर आरोप लगाया कि शहर में कोविड-19 से हुई 951 मौतें की गिनती बीएमसी ने नहीं की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये 951 मौतें विभिन्न प्राइवेट अस्पतालों में हुई हैं। फडणवीस ने इस मामले में सीएम उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से मौत के आंकड़े छिपाना आपराधिक कृत्य है।

उन्होंने मांग की थी कि राज्य सरकार हर जिले में डेथ ऑडिट कमिटी बनाए। उन्होंने लिखा है कि इस संबंध में डब्ल्यूएचओ की गाइ़डलाइन और आईसीएमआर ने भी साफ किया है। उन्होंने कहा कि वह जानना चाहते हैं कि किसने कोरोना मौतों के आंकड़े छिपाने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया। पूर्व सीएम ने आरोप लगाया है कि मुंबई में 951 मौतों के आंकड़े दर्ज नहीं किए गए हैं। 560 कोरोना मौतें मई में हुईं और 148 अब तक जून में हो चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों ने 951 मौतों की जगह 500 मौतें ही रेकॉर्ड कीं।


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