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मुंबई : मैं निकला गड्डी लेके… फिल्म ‘गदर’ का यह गीत आज ट्रक ड्राइवरों का प्रिय गाना है। मगर हकीकत में कुछ बदलाव है। यह बदलाव रिश्वत का है। ड्राइवर अपना ट्रक लेकर निकलते हैं और आगे बढ़ने के लिए पुलिस, आरटीओ व अन्य अधिकारियों को रिश्वत देते हैं। अगर न दें तो आगे न जा पाएं। हालत यह है कि देशभर में ट्रक चालकों को भारी भ्रष्टाचार से गुजरना पड़ता है।
एक सर्वे के मुताबिक ट्रक ड्राइवर सालाना करीब ४८ हजार रुपए रिश्वत देते हैं। ये चौंकानेवाला तथ्य ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ संस्था द्वारा किए गए सर्वे में सामने आया है। ये संस्था रोड सेफ्टी और परिवहन के क्षेत्र में काम करती है। सर्वे से पता चला है कि ट्रक ड्राइवरों को सालाना ४७,८५२ करोड़ रुपए की रिश्वत देनी पड़ती है ताकि वे ट्रक लेकर आगे जा सकें। इनमें स्टेट हाइवे अथॉरिटीज, ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ के लोग और टैक्स कलेक्ट करनेवाली एजेंसियों के लोगों के अलावा स्थानीय गुंडों का समावेश है, जिन्हें ये ट्रक ड्राइवर रिश्वत देते हैं।

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