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मुंबई : रेलवे में सुधार के लिए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल अपनाया जाएगा। इससे यात्री सुविधाएं सुधरेंगी और रेल नेटवर्किंग मजबूत होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेल बजट से संबंधित प्रस्ताव रखते हुए कहा कि आदर्श किराया कानून बनाया जाएगा। इसके जरिए विभाग यात्रियों की जरूरत, सुविधाओं और विभागीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किराया तय करेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि रेलवे में ढांचागत सुधार के लिए 2030 तक 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। इस बजट मे रेल और मेट्रो की 300 किमी की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। राष्ट्रीय परिवहन कार्ड का ऐलान किया गया है, जिसका उपयोग सड़क, रेलवे सहित परिवहन के सभी साधनों में किया जा सकता है। 

रेलवे में पूंजीगत खर्च के लिए पिछले साल 1.48 लाख करोड़ रुपये तय किए गए थे, जबकि बजट आवंटन 55,088 करोड़ रुपये था। नई पटरियों के निर्माण के लिए 7,255 करोड़ रुपये, गेज बदलने के लिए 2200, दोहरीकरण के लिए 700, रॉलिंग स्टॉक के लिए 6,114.82 और सिग्नल एवं दूरसंचार के लिए 1,750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि रेलवे को विशेष उद्देश्य कंपनियों (एसपीवी) के जरिए उपनगरीय रेलवे में निवेश करने और पीपीपी के जरिए मेट्रो रेल नेटवर्क बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। 

रेलवे नेटवर्क का विस्तार 

इस साल रेलवे की 500 किमी लंबी नई लाइनें बिछाई जाएंगी। 600 किमी पटरियों को ब्रॉडगेज में बदला जाएगा। 2650 किमी लंबी लाइनों का दोहरीकरण होगा। साथ ही 725 नए इलेक्ट्रिक इंजन खरीदे जाएंगे। 7690 यात्री कोच, 7000 किमी रूटों का इलेक्ट्रिफिकेशन होगा। 3900 किमी लंबे पुराने ट्रैक का नवीनीकरण किया जाएगा। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट को 2023 तक पूरा करने का टारगेट है। 


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