महंगाई का एक और झटका... महाराष्ट्र में दूध की कीमत बढ़ने की आशंका
मुंबई: महाराष्ट्र में कम बारिश, सूखे जैसी परिस्थितियों और पशुओं के चारे की कमी का असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। राज्य के कई हिस्सों में पशुपालकों के सामने चारे और पानी की समस्या बढ़ने से दूध उत्पादन की लागत पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। दूध उत्पादन में पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में हरा और सूखा चारा सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल है।
बारिश कम होने पर खेतों में चारा उत्पादन प्रभावित होता है। इसके साथ ही पानी की उपलब्धता कम होने से पशुपालकों की परेशानी बढ़ जाती है। चारे की मांग बढ़ने और उपलब्धता घटने की स्थिति में कीमतों में तेजी आने लगती है। पशुपालकों के लिए दूध उत्पादन की लागत का बड़ा हिस्सा पशुओं के आहार पर खर्च होता है। हरा चारा उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें बाजार से सूखा चारा और पशु आहार खरीदना पड़ता है। इनके दाम बढ़ने से एक लीटर दूध तैयार करने की लागत भी बढ़ जाती है। यही बढ़ी हुई लागत आगे चलकर दूध के खुदरा भाव पर असर डाल सकती है।
सूखे जैसी स्थिति केवल चारे की उपलब्धता को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि पशुओं की उत्पादकता पर भी इसका असर पड़ सकता है। पर्याप्त पानी और पौष्टिक आहार नहीं मिलने पर दूध देने वाले पशुओं का उत्पादन कम हो सकता है। यदि बाजार में दूध की आपूर्ति मांग के मुकाबले कम होती है तो कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पैदा हो सकता है। महाराष्ट्र देश के प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों में शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जुड़े हैं। किसानों के लिए दूध रोजाना आय का एक महत्वपूर्ण जरिया है। ऐसे में चारे और पशु आहार की बढ़ती लागत सीधे उनकी आमदनी को प्रभावित करती है।
पशुपालकों के सामने दूसरी चुनौती यह है कि दूध के दाम में बढ़ोतरी नहीं होने पर उन्हें बढ़ी हुई उत्पादन लागत खुद वहन करनी पड़ती है। दूसरी तरफ अगर खरीद मूल्य बढ़ाया जाता है तो डेयरी कंपनियों पर भी लागत का दबाव बढ़ता है। ऐसी स्थिति में खुदरा बाजार में दूध की कीमत बढ़ने की संभावना पैदा हो जाती है। दूध महंगा होने का असर केवल घरों में इस्तेमाल होने वाले पैकेट दूध तक सीमित नहीं रहता। दूध की कीमत बढ़ने पर दही, पनीर, घी, मक्खन, मिठाई और दूसरे डेयरी उत्पादों की लागत भी प्रभावित हो सकती है। होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई कारोबार से जुड़े लोगों पर भी इसका असर पड़ सकता है। आम परिवारों के मासिक बजट में दूध की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी होती है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों वाले परिवारों में इसकी नियमित खपत होती है। इसलिए दूध के भाव में कुछ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी भी महीने के घरेलू खर्च को बढ़ा सकती है।
हालांकि दूध की कीमत वास्तव में कितनी बढ़ेगी या बढ़ोतरी कब से लागू होगी, इसे लेकर अंतिम निर्णय संबंधित डेयरी कंपनियों और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। चारे की उपलब्धता, दूध का उत्पादन, खरीद मूल्य और मांग जैसे कई कारक कीमत तय करने में भूमिका निभाते हैं। फिलहाल कम बारिश और चारे की कमी ने महाराष्ट्र के पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। यदि आने वाले दिनों में चारे और पशु आहार की कीमतों में राहत नहीं मिलती और दूध उत्पादन प्रभावित होता है तो इसका असर उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। ऐसे में पहले से महंगाई का सामना कर रहे लोगों को दूध के बढ़े दाम के रूप में एक और झटका लग सकता है।