मुंबई : दिशा सालियन केस में नया मोड़ निलेश ओझा ने पेश किया नया दावा...
मुंबई : दिशा सालियन की मौत के मामले में उनके पिता सतीश सालियन की ओर से पैरवी कर रहे वकील निलेश ओझा ने शनिवार को नए दावे किए। ओझा ने कहा कि मामले में जैसे-जैसे नए दस्तावेज और अन्य सामग्री सामने आ रही है, उससे उनके पहले उठाए गए सवालों को बल मिल रहा है। उन्होंने पूर्व मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की बहाली से जुड़ी कथित रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि यह दस्तावेज गृह मंत्रालय को सौंपा गया था और इससे मामले में कुछ नए सवाल खड़े होते हैं।हालांकि, ओझा के इन दावों को अभी जांच एजेंसियों या अदालत की ओर से स्थापित तथ्य नहीं माना गया है। दिशा सालियन की मौत के मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रहा है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 के अपने आदेश में कहा था कि मामले में संज्ञेय अपराध की जांच जरूरी है, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया था कि वह लगाए गए आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दे रही है, ताकि जांच प्रभावित न हो।
निलेश ओझा ने बातचीत में कहा कि उन्हें गृह मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट के रूप में नया दस्तावेज मिला है। उनके मुताबिक, यह रिपोर्ट सचिन वाजे की पुलिस सेवा में बहाली से संबंधित है। ओझा ने दावा किया कि इस दस्तावेज में मौजूद जानकारियां दिशा सालियन मामले से जुड़े उनके कुछ पुराने सवालों को और मजबूत करती हैं।ओझा ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही मामले की जांच, दिशा के शव की स्थिति और कुछ अन्य परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए थे। उनका दावा है कि हाई कोर्ट के आदेश, SIT से जुड़े रिकॉर्ड और CBI के पास उपलब्ध सामग्री के बाद उनके आरोपों की पुष्टि हो रही है।हालांकि, यह ओझा का पक्ष है। गृह मंत्रालय की कथित रिपोर्ट की पूरी सामग्री और उससे दिशा सालियन की मौत के मामले का प्रत्यक्ष संबंध स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सितंबर में सतीश सालियन की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में विस्तृत जांच की जरूरत मानी थी। अदालत ने कहा था कि पहले की जांच मुख्य रूप से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 174 के तहत हुई थी और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए संज्ञेय अपराध की जांच आवश्यक है।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है। हाई कोर्ट ने कहा था कि जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से और पूरी तरह जांच करने का अवसर मिलना चाहिए।इसके बाद CBI ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, FIR में किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया और एजेंसी सतीश सालियन की शिकायत में उठाए गए आरोपों और नामों की जांच कर रही है।
इससे पहले सतीश सालियन और उनके वकील निलेश ओझा ने CBI को एक पेन ड्राइव भी सौंपी थी। उन्होंने दावा किया था कि इसमें वीडियो, तस्वीरें, गवाहों से संबंधित सामग्री और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद हैं, जो मामले की जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।ओझा ने उस समय भी कहा था कि CBI को इन सामग्रियों की जांच करनी चाहिए और जिन लोगों का उल्लेख शिकायत में किया गया है, उनकी भूमिका की पड़ताल होनी चाहिए। इन सामग्रियों की प्रामाणिकता और जांच में उनका महत्व CBI द्वारा परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।
दूसरी ओर, सचिन वाजे ने दिशा सालियन मामले में निलेश ओझा की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। वाजे ने विशेष NIA अदालत में एक हस्तलिखित आवेदन देकर कहा कि उनका दिशा सालियन मामले से कोई संबंध नहीं है और उनके बारे में कथित कबूलनामे से जुड़े दावे गलत हैं।वाजे ने अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि अगर CBI दिशा सालियन मामले में उनकी पेशी या हिरासत मांगती है, तो कोई आदेश पारित करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, उनका नाम FIR में संदर्भित है, लेकिन उन्हें आरोपी के तौर पर नामित नहीं किया गया है।
ओझा लंबे समय से सचिन वाजे की पुलिस सेवा में बहाली के समय और उससे जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि दिशा सालियन की मौत से पहले वाजे की बहाली की परिस्थितियों की भी जांच होनी चाहिए। इससे पहले भी उन्होंने इस विषय को दिशा सालियन मामले से जोड़ते हुए कई आरोप लगाए थे।अब उन्होंने जिस कथित गृह मंत्रालय रिपोर्ट का उल्लेख किया है, उसे इसी दावे से जोड़कर पेश किया है। फिलहाल इस दस्तावेज के आधार पर किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका स्थापित नहीं हुई है।
दिशा सालियन मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण पहलू CBI की जांच है। एजेंसी को पुराने पुलिस रिकॉर्ड, SIT से संबंधित सामग्री, सतीश सालियन द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों की जांच करनी है। इसके अलावा जांच एजेंसी संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड भी देख सकती है। मामले में आरोप और प्रत्यारोप दोनों सामने आए हैं। एक तरफ सतीश सालियन और उनके वकील पहले की जांच पर सवाल उठाते हुए नए सबूत मिलने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सचिन वाजे ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।ऐसे में निलेश ओझा की ओर से गृह मंत्रालय की कथित रिपोर्ट को लेकर किया गया नया दावा जांच का विषय है। इस दस्तावेज की प्रामाणिकता, संदर्भ और दिशा सालियन की मौत से उसका कोई संबंध है या नहीं, इसका निष्कर्ष CBI की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।