16 साल की दिव्या महाजन ने रचा इतिहास, 15 घंटे 50 मिनट में पार किया नॉर्थ चैनल
नासिक: महाराष्ट्र के नासिक की 16 वर्षीय तैराक दिव्या महाजन ने अंतरराष्ट्रीय ओपन-वॉटर स्विमिंग में शानदार उपलब्धि हासिल करते हुए उत्तरी आयरलैंड और स्कॉटलैंड के बीच स्थित नॉर्थ चैनल को तैरकर पार कर लिया है। दिव्या ने करीब 15 घंटे 50 मिनट तक लगातार तैरते हुए इस चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्ग को पूरा किया। इस उपलब्धि के साथ वह नॉर्थ चैनल पार करने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की तैराक बन गई हैं। दिव्या की यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि नॉर्थ चैनल को दुनिया की सबसे कठिन ओपन-वॉटर तैराकियों में शामिल किया जाता है। इसे ‘ओशन्स सेवन’ चुनौती के सबसे मुश्किल हिस्सों में से एक माना जाता है। यहां तैराकों को बेहद ठंडे पानी, तेज समुद्री धाराओं, बदलते ज्वार-भाटे, तेज हवाओं और जेलीफिश जैसे समुद्री जीवों के खतरे का सामना करना पड़ता है।
करीब 40 किलोमीटर की कठिन तैराकी
दिव्या ने डोनाघाडी से पोर्टपैट्रिक तक का समुद्री रास्ता तैरकर पूरा किया। इस मार्ग की दूरी लगभग 40 किलोमीटर बताई जाती है। हालांकि समुद्र की धाराओं और मौसम की परिस्थितियों के कारण तैराक को वास्तविक दूरी इससे काफी अधिक तय करनी पड़ सकती है। दिव्या ने करीब 15 घंटे 50 मिनट तक पानी में रहकर यह चुनौती पूरी की। इस दौरान उन्हें लगातार बदलती समुद्री परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। ठंडे पानी में इतने लंबे समय तक तैरना अपने आप में शारीरिक और मानसिक मजबूती की बड़ी परीक्षा माना जाता है।
नॉर्थ चैनल की सबसे बड़ी चुनौतियों में पानी का तापमान शामिल है। समुद्र का पानी बेहद ठंडा होने के कारण तैराक के शरीर पर इसका असर लंबे समय तक तैरने के दौरान बढ़ता जाता है। इसके अलावा समुद्री धाराएं तैराक की दिशा और गति को लगातार प्रभावित करती हैं। ‘ओशन्स सेवन’ के सबसे कठिन हिस्सों में शामिल नॉर्थ चैनल को ‘ओशन्स सेवन’ के सात प्रमुख समुद्री तैराकी मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद इन समुद्री मार्गों को पार करना ओपन-वॉटर तैराकों के लिए बेहद कठिन चुनौती होती है।
नॉर्थ चैनल को विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहां पानी का तापमान कम रहता है और मौसम तेजी से बदल सकता है। तेज हवाएं और समुद्री धाराएं तैराक के सामने अतिरिक्त मुश्किलें पैदा करती हैं। जेलीफिश का खतरा भी इस तैराकी को और कठिन बना देता है। तैराकों को बिना किसी रुकावट के लगातार आगे बढ़ना होता है, जबकि समुद्र की प्राकृतिक परिस्थितियां उनके नियंत्रण से बाहर होती हैं।