नवी मुंबई : नवी मुंबई साइबर पुलिस ने महापे इलाके में चल रहे एक हाई-टेक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस का आरोप है कि इस कॉल सेंटर के जरिए देशभर के लोगों को वाहन इंश्योरेंस रिन्यूअल के नाम पर निशाना बनाया जाता था और उनसे ठगी की जाती थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही छापेमारी में बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, यह फर्जी कॉल सेंटर बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपी कथित तौर पर वाहन मालिकों को फोन कर उनके गाड़ी के इंश्योरेंस की अवधि खत्म होने या रिन्यूअल की जरूरत बताकर संपर्क करते थे। इसके बाद वे खुद को इंश्योरेंस कंपनी या संबंधित विभाग के प्रतिनिधि के रूप में पेश कर लोगों से निजी जानकारी और भुगतान से जुड़ी जानकारी हासिल करते थे।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क देश के कई हिस्सों तक फैला हुआ था। आरोपी कथित रूप से अलग-अलग राज्यों में रहने वाले वाहन मालिकों को फोन कर उन्हें झांसे में लेते थे। साइबर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जी कॉल सेंटर से कितने लोगों को निशाना बनाया गया और कितनी रकम की धोखाधड़ी की गई। पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई के दौरान मौके से 26 मोबाइल फोन, 27 हार्ड डिस्क और पांच लैपटॉप बरामद किए गए हैं। जब्त किए गए उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इन डिजिटल उपकरणों से गिरोह की कार्यप्रणाली, संपर्कों और संभावित पीड़ितों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

यह कार्रवाई साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार की ‘प्रगति’ पहल के तहत मिली तकनीकी जानकारी के आधार पर की गई। महाराष्ट्र साइबर विभाग ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से चिन्हित संदिग्ध सिम कार्ड और उनकी लोकेशन से जुड़ी जानकारी नवी मुंबई पुलिस के साथ साझा की थी। तकनीकी इनपुट मिलने के बाद नवी मुंबई साइबर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। जांच के दौरान महापे इलाके में संचालित एक कॉल सेंटर के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने योजना बनाकर छापेमारी की और वहां से आरोपियों को गिरफ्तार किया।

साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें। वाहन इंश्योरेंस, बैंकिंग या अन्य सेवाओं से जुड़े मामलों में हमेशा संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यमों से ही संपर्क करें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि साइबर ठग अक्सर आकर्षक ऑफर या जरूरी सेवा का बहाना बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों का स्वरूप भी बदल रहा है। फर्जी कॉल सेंटर अब तकनीक और डेटा का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंच बना रहे हैं। ऐसे अपराधों को रोकने के लिए जागरूकता और समय पर शिकायत दोनों जरूरी हैं। नवी मुंबई साइबर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की जांच से गिरोह की पूरी गतिविधियों का खुलासा होने की उम्मीद है। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी कॉल सेंटर के जरिए कितने लोगों से संपर्क किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे गिरोहों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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