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ठाणे : ठाणे के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2011 में मोखाडा क्षेत्र में हुई एक दर्दनाक जीप दुर्घटना में जान गंवाने वाली 21 वर्षीय महिला के परिवार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने मृतका के परिवार को 14.81 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही, हादसे के लिए वाहन चालक को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराते हुए बीमा कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह पहले मुआवजे की राशि का भुगतान करे और बाद में इसे वाहन मालिक से वसूल करे।

परिवार की ओर से दायर दावे में बताया गया कि यात्रियों ने कई बार चालक से वाहन की रफ्तार कम करने और सावधानी से चलाने का अनुरोध किया था। लेकिन चालक ने कथित रूप से उनकी बातों को नजरअंदाज किया। इसी दौरान चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और जीप सड़क से नीचे जाकर करीब 200 फीट गहरी घाटी में गिर गई। इस दुर्घटना में कई लोग घायल हुए थे। हादसे में 21 वर्षीय उषा दीपक भाकरे को गंभीर चोटें आई थीं। उनके सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में नासिक सिविल अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

उषा भाकरे की मौत के बाद उनके परिवार ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल में मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी। परिवार की ओर से दलील दी गई कि मृतका की असमय मौत से उन्हें आर्थिक और भावनात्मक नुकसान हुआ है। उन्होंने दुर्घटना के लिए चालक की लापरवाही को जिम्मेदार बताया और उचित मुआवजे की मांग की। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने दुर्घटना से जुड़े रिकॉर्ड, पुलिस दस्तावेजों और गवाहों के बयानों पर विचार किया। ट्रिब्यूनल ने पाया कि हादसा चालक की लापरवाही और वाहन पर नियंत्रण खोने के कारण हुआ था। इसके आधार पर चालक को दुर्घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार माना गया।

MACT ने अपने आदेश में कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना चालक की जिम्मेदारी होती है। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वाहन चालक का कर्तव्य है और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हुई दुर्घटना में पीड़ित परिवार को मुआवजा मिलना आवश्यक है। ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह मृतका के परिवार को 14.81 लाख रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान करे। हालांकि, बीमा कंपनी को बाद में यह राशि वाहन मालिक से वसूलने का अधिकार दिया गया है। इस तरह ट्रिब्यूनल ने पीड़ित परिवार को राहत देने के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करने का भी आदेश दिया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, मोटर दुर्घटना मामलों में ट्रिब्यूनल का उद्देश्य पीड़ित परिवार को जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना होता है। कई मामलों में बीमा कंपनियों को पहले भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है, ताकि पीड़ित पक्ष को लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण आर्थिक परेशानी न उठानी पड़े। इस फैसले को दुर्घटना पीड़ित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सड़क हादसों में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए मुआवजा राशि आर्थिक सहारा प्रदान करती है। वहीं, ऐसे फैसले वाहन चालकों को यातायात नियमों के पालन और जिम्मेदारी से वाहन चलाने का संदेश भी देते हैं। ठाणे MACT के इस फैसले ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और वाहन चालकों की जिम्मेदारी के मुद्दे को सामने ला दिया है। लापरवाही से वाहन चलाने के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में न केवल लोगों की जान जाती है, बल्कि उनके परिवारों को लंबे समय तक आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुसार मृतका के परिवार को मुआवजा राशि मिलने का रास्ता साफ हो गया है। यह फैसला 2011 के उस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाली उषा भाकरे के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद मिली कानूनी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

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