समुद्री अपराध पर बड़ा एक्शन, उम्रकैद की सजा
मुंबई : समुद्री सुरक्षा से जुड़े एक बड़े मामले में मुंबई की विशेष अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए 44 सोमाली समुद्री डाकुओं को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने समुद्री डकैती, अपहरण और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर अपराधों को देखते हुए दोषियों की दया याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले के जरिए अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि समुद्री अपराधों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों के प्रति कानून किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेगा।
विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सभी दोषियों के खिलाफ समुद्री डकैती निरोधक कानून, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए और भारतीय कानून की संबंधित धाराओं के तहत अपराध साबित हुए हैं। विशेष जज संजय दिघे ने कहा कि आरोपियों द्वारा किए गए अपराध बेहद गंभीर प्रकृति के हैं, जिनका असर केवल एक व्यक्ति या जहाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था प्रभावित होती है।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपियों की व्यक्तिगत परेशानियों को सजा कम करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। दोषियों ने अदालत से अपील की थी कि भारतीय जेल में रहने के दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने भाषा, खान-पान और संस्कृति अलग होने के साथ-साथ परिवार और परिचितों से दूर रहने की परेशानी का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने की मांग की थी। दोषियों ने यह भी कहा था कि वे पिछले करीब दो वर्षों से भारतीय जेल में बंद हैं और उन्हें किसी तरह की पारिवारिक सहायता नहीं मिल पा रही है। उन्होंने खुद को गरीब नागरिक बताते हुए भारतीय न्याय व्यवस्था से दया की उम्मीद जताई थी। हालांकि अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उनकी सभी दलीलों को अस्वीकार कर दिया।
भारतीय नौसेना के अभियान में पकड़े गए थे आरोपी मामले के अनुसार, मार्च 2024 में भारतीय नौसेना ने समुद्र में चलाए गए दो अलग-अलग अभियानों के दौरान इन सभी 44 सोमाली समुद्री डाकुओं को गिरफ्तार किया था। पहले अभियान में नौ समुद्री डाकुओं को पकड़ा गया था। नौसेना ने उनके कब्जे से एक ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाज को मुक्त कराया था, जिस पर कुछ पाकिस्तानी नागरिक भी मौजूद थे। इसके बाद दूसरे अभियान में 35 अन्य सोमाली समुद्री डाकुओं को एक व्यापारी जहाज के अपहरण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। नौसेना की कार्रवाई के बाद सभी आरोपियों को मुंबई लाया गया, जहां येलो गेट पुलिस स्टेशन ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया और कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों ने अदालत के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। इसके बाद अदालत ने उपलब्ध सबूतों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर फैसला सुनाया। सरकार ने मांगी थी कड़ी सजा मामले में सरकारी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि समुद्री डकैती जैसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। विशेष लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि आरोपियों के अपराध बेहद गंभीर हैं और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ा संदेश देना आवश्यक है। अदालत ने सरकारी पक्ष की दलीलों से सहमति जताते हुए सभी 44 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। यह फैसला समुद्री सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री अपराधों के खिलाफ भारत के सख्त रुख का संदेश जाता है।