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मुंबई ; केंद्रीय बजट में महाराष्ट्र की पूरी तरह उपेक्षा किए जाने को लेकर शिवसेना नेता व युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे ने कल जोरदार नाराजगी प्रकट की। जीडीपी हो या जीएसटी हर क्षेत्र में महाराष्ट्र का योगदान सबसे अधिक है। केंद्र सरकार के खजाने में सबसे अधिक योगदान देने वाला हमारा राज्य मोदी सरकार की गणना में भी नहीं है। मुंबई और महाराष्ट्र के लिए एक भी बड़ी घोषणा नहीं है। इन शब्दों में आदित्य ठाकरे ने जोरदार हमला बोला।

निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किए गए बजट पर आदित्य ठाकरे ने विस्तृत ‘एक्स’ पोस्ट की। बजट के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर उन्होंने ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट पर बोलते समय पूरे देश की बात होना अपेक्षित है, लेकिन देश के राजनीति में फंसने का कहीं न कहीं असर पड़ा है।

लगातार नियम बदले

पिछले एक दशक में भाजपा ने नियम लगातार बदले हैं इसलिए यह बजट पूरे देश का नहीं लगता। ऐसा होता तो मुंबई के लिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र देने की मेरी मांग मान्य हुई होती। कदाचित बंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली के लिए ही दे दिए जाते। इससे देश का सही मायने में राष्ट्रीय और प्राकृतिक विकास हुआ होता। गिफ्ट सिटी की तरह यह फेल नहीं हुआ होता। इस तरह का तंज आदित्य ठाकरे ने कसा। 

शिवसेना नेता, विधायक व युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे ने कल केंद्रीय बजट की आलोचना की। उन्होंने कहा कि महिला, किसान, युवा और गरीब-वंचित वर्ग पूरी तरह उपेक्षित है। रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। डेटा सेंटर्स की बात तो है, लेकिन उनसे नौकरियां नहीं बनतीं। भू-राजनीतिक कारणों से पैदा हुई आर्थिक अस्थिरता पर चुप्पी है। रुपए की गिरती हालत पर पहले हंगामा होता था, लेकिन अब स्थिति कमजोर होने के बावजूद वित्त मंत्री ने कुछ नहीं कहा और नागरिकों को भरोसा देने के बजाय इसे नजरअंदाज किया।

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