नियमों ने घटाए गैस्ट्रो के मरीज!
मुंबई, कोरोना महामारी के चलते बीते डेढ़ सालों से मुंबईकरों द्वारा बरती जा रही सावधानियों के चलते मौसमी बीमारियां नियंत्रण में आ गई हैं। इनमें गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मामलों में ८३ फीसदी और पीलिया में ६७ फीसदी की कमी आई है। वहीं मनपा के अपर आयुक्त सुरेश काकाणीr ने कहा कि मास्क, सेनिटाइजर और हाथ धोने के नियमों के प्रयोग से महामारी पर अंकुश लगा है।
पहला कोरोना मरीज पिछले साल ११ मार्च को मुंबई में मिला था। इसके बाद कुछ ही दिनों में कोरोना मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ, वहीं कोरोना वायरस के गुणों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इससे बचाव के उपाय जारी किए गए थे। इनमें सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का उपयोग, बार-बार हाथ धोना और सेनिटाइजर का उपयोग शामिल है। मनपा के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इन नियमों के पालन से घनी आबादी सहित विभिन्न क्षेत्रों में कोरोना और दूसरे संक्रामक रोगों पर अंकुश लगाने में सफलता मिली है।
नवंबर के पहले सप्ताह में सामने आई रिपोर्ट में देखा गया कि मुंबई में मौसमी बीमारियां नियंत्रण में आ गई हैं। इसमें मलेरिया के ७२, लेप्टो के १, डेंगू के ४७, गैस्ट्रो के ४९, हेपेटाइटिस के ६, चिकनगुनिया के ६ और स्वाइन फ्लू के एक मरीज मिले हैं। दूसरी तरफ अक्टूबर महीने में मलेरिया के ५७६, लेप्टो के ३१, डेंगू के २५४, गैस्ट्रो के २४७, हेपेटाइटिस के ४१, चिकनगुनिया के ३३ और एच १ एन १ के ८ मरीज मिले थे। अच्छी बात यह रही की बीते महीने इन बीमारियों से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई।
मुंबई में इस समय सिर्फ २,९०६ एक्टिव कोरोना मरीज हैं। मरीज के ठीक होने की दर ९७ फीसदी और संक्रमण दर घटकर ०.०३ फीसदी पर आ गई है। साथ ही मरीजों के दोगुने होने की अवधि २,१३६ दिन हो गई है।