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भारत में कोरोना वायरस का अभी और विकराल रूप देखने को मिल सकता है। देश में कोरोना वायरस संक्रमण के आंकड़े और उससे होने वाली मौतें बढ़ती जा रही हैं। अमेरिका स्थित इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) का अनुमान है कि अगर 'कठोर कदम' नहीं उठाए गए तो 1 अगस्त तक भारत में 10 लाख से ज्यादा कोविड मौतें हो सकती हैं। इससे पहले संस्था ने इस तारीख तक 960,000 मौतों का अनुमान लगाया था।

आईएचएमई ने कहा कि हेल्थ सिस्टम को मजबूत करने के लिए कठोर कदम उठाए बिना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और फेस मास्क के प्रभावी इस्तेमाल के बिना भारत की स्थिति काफी खराब दिखती है। आईएचएमई वाशिंगटन विश्वविद्यालय में एक वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र है। कोविड-19 पर इसके अनुमानों को व्यापक रूप से मजबूत मॉडल के आधार पर स्वीकार किया गया है। 

अनुमान है कि 1 अगस्त 2021 तक भारत में 1,019,000 कोविड मौतें हो सकती हैं। सबसे खराब स्थिति में मौतों की संख्या 12 लाख तक हो सकती है। अनुमान 25 से 30 अप्रैल के बीच के डेटा पर आधारित है। इस जानलेवा बीमारी के चलते पिछले हफ्ते कोरोना से मरने वालों की संख्या में 78% का इजाफा दर्ज किया गया। अमेरिका में बाइडन  प्रशासन के शीर्ष अफसर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सलीवियन  ने कहा कि भारत में यह महामारी काबू से बाहर हो चुकी है। 

आईएचएमई का अनुमान है कि रोजाना हो रही कोविड मौतों की पीक 20 मई को होगी, जब एक दिन में 12,000 मौतें हो सकती हैं। संस्था ने पहले इस पीक के लिए 16 मई की तारीख का अनुमान लगाया था। हालांकि अगर यूनिवर्सल मास्क कवरेज (95%) तक अगले हफ्ते में पा लिया जाता है तो हमारे मॉडल के हिसाब से 1 अगस्त तक अनुमानित मौतों में 73,000 की कमी आ जाएगी। 

आईएचएमई ने कहा कि उसका अनुमान इस बात पर आधारित है कि क्या होने की सबसे ज्यादा संभावना है। आईएचएमई ने कहा कि अगर वैक्सीन इसी रफ्तार पर दी जाती हैं और सरकार किस तरह सोशल डिस्टेंसिंग नियमों को लागू कराती है, इस पर मॉडल आधारित है। 


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