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मुंबई : पिछले सप्ताह मध्य रेलवे ने मेनलाइन पर एसी लोकल चलाई है। गत गुरुवार से चली इस लोकल में सप्ताहभर में बमुश्किल 100 यात्रियों ने सफर किया। ऐसा ही हाल पश्चिम रेलवे का रहा है। यहां लॉकडाउन के बाद जब से एसी लोकल चली है, तब से प्रतिदिन औसतन केवल 40 यात्रियों ने सफर किया है। हालांकि, सामान्य स्थितियों के मुकाबले फिलहाल तकरीबन 20 प्रतिशत यात्री मुंबई की लोकल ट्रेनों में यात्रा करने लगे हैं और लगभग 90% उपनगरीय सेवाएं चलने लगी हैं।
लॉकडाउन से पहले फुल टाइमटेबल के दौरान एसी लोकल के एक रेक को सेवा में शामिल करने के लिए पश्चिम रेलवे को 12 सामान्य सेवाएं हटानी पड़ी थीं। यह स्थिति मध्य रेलवे पर भी पैदा होगी। एक अधिकारी ने बताया कि मुंबई में लोगों को लग्जरी के बजाय कम स्थान में ज्यादा से ज्यादा लोगों को फिट होने की आदत है। ऐसे में एसी लोकल को मौजूदा रूप के चलाना चुनौतीभरा काम होगा। गौरतलब है कि लॉकडाउन से पहले सेमी एसी लोकल चलाने पर भी विचार किया जा रहा था। फर्स्ट क्लास बोगी के बजाय एसी लोकल के डिब्बों को बदलने की बात हो रही थी। अधिकारियों के अनुसार, यही फॉर्मूला बैठ सकता है।
पश्चिम रेलवे पर रोजाना औसतन 7.5 लाख लोग यात्रा कर रहे हैं। इतने ही यात्री मध्य रेलवे पर यात्रा कर रहे हैं। रेलवे द्वारा प्राप्त ये आंकड़े उन यात्रियों से जुड़े हैं, जो आधिकारिक तौर पर टिकट खरीदकर यात्रा कर रहे हैं। अतिआवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों की मानें तो शाम के वक्त ट्रेनों में अब पहले जैसी स्थिति होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। रात 9 बजे के बाद तो टैक्सी या ऑटो वाले, होटल व्यवसाय से जुड़े लोग, सब्जी बेचने वाले लोग सब लोकल में बेटिकट यात्रा करने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, रोजाना दिनभर में करीब दो लाख लोग बेटिकट यात्रा कर रहे हैं।
मुंबईकरों के मन में फिलहाल एक ही सवाल चल रहा है कि आखिरकार कब चलेगी लोकल। सूत्रों के अनुसार, 31 दिसंबर तक तो स्थितियां सामान्य होने का सवाल ही नहीं। 2021 के पहले सप्ताह में राज्य सरकार की ओर से दोबारा रेलवे को प्रपोजल जा सकता है। इसके 2-3 दिन में निर्णय लिया जा सकता है। अधिकारियों की मानें तो जनवरी के पहले सप्ताह में या 15 जनवरी तक पूरी तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।
गौरतलब है कि 28 अक्टूबर को राज्य सरकार ने रेलवे को पत्र लिखकर शर्तों के साथ सामान्य लोगों को अनुमति देने की मांग की थी। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार के अनुसार, 28 अक्टूबर के बाद राज्य सरकार द्वारा शिक्षक और बोर्ड की परीक्षाओं में बैठने वाले विद्यार्थियों के लिए अनुमति मांगी गई, लेकिन सामान्य लोगों के लिए अब तक कोई बात नहीं हुई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने जिस तरह से यात्रियों का वर्गीकरण किया था, उसके बाद रेलवे ने वास्तविक स्थिति बताई। ऐसे में हो सकता है कि सामान्य यात्रियों के लिए दोबारा वर्गीकरण किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि यह भी संभव है कि वकीलों, सिक्यॉरिटी गार्ड और महिलाओं की तरह अन्य वर्गों को भी धीरे-धीरे अनुमति दी जाए।

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