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महाराष्ट्र : महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में पिछले सात महीनों से लोकट ट्रेन में आम लोगों को सफर की इजाजत नहीं है। इससे परेशान करीब 60 लाख लोग महाराष्ट्र सरकार और रेलवे की लड़ाई में पिस रहे हैं। महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने शुक्रवार को कहा कि आम लोगों को लोकल ट्रेन सेवा मुहैया कराने के लिए रेलवे प्रशासन को राजनीति को बीच में लाए बिना महाराष्ट्र सरकार के सहयोग करना चाहिए।

गृह मंत्री देशमुख ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने आम यात्रियों के लिहाज से समय-सारिणियों का प्रस्ताव दिया है। रेलवे प्रशासन को इसके अनुसार महाराष्ट्र सरकार का सहयोग करना चाहिए। अगर रेलवे बेहतर ढंग से सहयोग करे, तो लोगों को असुविधाएं नहीं होंगी। इसलिए रेलवे प्रशासन को इसमें राजनीति को बीच में लाए बिना सरकार का सहयोग करना चाहिए ताकि आम यात्री ट्रेन सेवा का लाभ उठा सकते हैं। 

महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को रेलवे को प्रस्ताव दिया था कि मुंबई की लोकल ट्रेनों में आम लोगों को भी अब यात्रा की अनुमति दी जानी चाहिए। फिलहाल, यह सेवा कोविड-19 के मद्देनजर सिर्फ अनिवार्य सेवा से जुड़े कर्मचारियों और चुनिंदा समूहों के लोगों के लिए उपलब्ध है। 

रेलवे प्राधिकारियों ने इस पर एक तरह से उदासीनता दर्शाते हुए गुरुवार को कहा कि सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए सामान्य दिनों के मुकाबले अब सिर्फ 25 फीसदी से थोड़े ही ज्यादा यात्री सफर कर सकते हैं। बता दें कि मुंबई की ‘जीवनरेखा’ कही जाने वाली मुंबई उपनगरीय लोकल ट्रेनों में कोविड-19 महामारी से पहले रोजाना करीब 80 लाख यात्री सफर करते थे।

सरकार ने रेलवे प्राधिकारियों के समक्ष प्रस्ताव रखा है कि मुंबई की लोकल ट्रेनों में कम भीड़-भाड़ वाले घंटों में आम यात्रियों को यात्रा की मंजूरी दी जाए। रेलवे को लिखे पत्र में राज्य सरकार ने सलाह दी है कि वैध टिकट रखने वाले किसी भी व्यक्ति को सुबह में 7:30 बजे तक इसके बाद 11 बजे से शाम चार बजे तक और फिर रात आठ बजे से दिन की समाप्ति तक यात्रा की मंजूरी दी जाए। वहीं सुबह आठ बजे से 10:30 बजे और फिर शाम पांच बजे से 7:30 बजे तक अनिवार्य सेवाओं से जुड़े कर्मी यात्रा करें और प्रत्येक घंटे महिलाओं के लिए आरक्षित ट्रेनें चलनी चाहिए।


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