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मुंबई : वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से राज्य में गंभीर संकट है. इसके बावजूद खुद की तिजोरी भरने के लिए बड़े पैमाने पर अधिकारियों और कर्मचारियों  का मनचाही जगह पर तबादला किया गया है. बीजेपी इसे ट्रांसफर घोटाला बताते हुए अदालत में चुनौती देने की तैयारी की है.  प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की सीआईडी जांच कराने की मांग की है. मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में पाटिल ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत जांच का आदेश नहीं दिया गया तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा. 

 बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि, राज्य सरकार के वित्त विभाग ने 4 मई सरकारी आदेश को जारी किया था,जिसमें कहा गया था कि कोरोना के कारण अधिकारियों एवं कर्मचारियों का तबादला न किया जाय. लेकिन  7 जुलाई को सरकारी आदेश जारी कर 15 प्रतिशत तबादले  की अनुमति दे दी गई. उन्होंने कहा कि 15  प्रतिशत तबादले की अनुमति देते समय 31 मई तक सामान्य तबादले करने के बारे में स्पष्ट कहा गया था. इसके तहत जिन अधिकारी-कर्मचारी की 3 साल की समयसीमा समाप्त नहीं हो रही थी उन्हें भी हटा दिया गया और रिक्त स्थान पर अपनी पसंद के अधिकारियों को लाया गया.  तबादले के नियम के अनुसार तीन आईएएस अधिकारियों की आस्थापन समिति तबादले का प्रस्ताव करती है और यदि इसमें बदलाव करना हो तो संबंधित मंत्री को कारण के बारे लिखना होता है इसके पश्चात ही मुख्यमंत्री हस्ताक्षर करते हैं. तीन वर्ष पूरा नहीं हुआ और ऐसे ही तबादला करना हो तब भी मंत्री को कारण लिखित में दर्ज करना होता है और अंतिम हस्ताक्षर मुख्यमंत्री को करने का नियम होता है. पाटिल ने सवाल किया है कि सभी तबादलों में यह प्रक्रिया अपनाई गई क्या, इसका खुलासा करने की आवश्यकता है.


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