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मुंबई : बीसीजी का टीका कोरोना बीमारी को रोकने में वाकई कारगर है,इसका पता लगाने के लिए जल्द बीएमसी के अस्पताल में बीसीजी टीके का ट्रायल शुरू किया जाएगा. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अंतर्गत मुंबई के केईएम अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में बुजुर्गों पर बीसीजी के टीके का ट्रायल किया जाएगा.

कुछ शोध में बीसीजी टीका बीमारी को रोकने और रोगियों की सेहत में सुधार लाने के लिए मददगार साबित होने की बात भी सामने आई. ऐसे में आईसीएमआर ने भी अध्ययन कर यह पता लगाने की सोचा कि टीबी के खिलाफ उपयोग किया जाने वाला बीसीजी टीका क्या कोरोना वायरस संक्रमण को रोक सकता है. साथ ही क्या यह महामारी के हॉटस्पॉट इलाकों में रह रहे बुजुर्ग लोगों में रोग की गंभीरता तथा मृत्यु दर को घटा सकता है. आईसीएमआर के वैज्ञानिक और मीडिया समन्वयक डॉ. लोकेश शर्मा ने कहा कि उक्त परीक्षण के लिए  केईएम अस्पताल और मेडिकल कॉलेज का चयन किया है. 

बीएमसी की उप कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दक्षा शाह ने कहा कि केईएम अस्पताल में  बुजुर्गों पर बीसीजी के टीके का ट्रायल जल्द शुरू होगा. इस ट्रायल में 60 से 80 साल के 200 बुजुर्गों का समावेश होगा.एक वर्ष तक उनके स्वास्थ्य को मॉनिटर किया जाएगा.उसी के साथ कम्युनिटी से कुछ ऐसे लोगों के साथ की भी मानिटरिंग की जाएगी जिन्हें टीका नहीं दिया गया है.इससे यह पता चल पाएगा कि क्या वाकई में बीसीजी कोरोना से लड़ने में मददगार है.

सायन अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मोहन जोशी ने कहा कि बीसीजी का टीका अनेक बीमारियों से बचाने के लिए बालपन में दिया जाता है. कई शोध में यह बात सामने आई है कि वैक्सीन क्रॉस इम्युनिटी प्रदान करती है.बीएमसी के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के निदेशक और नायर अस्पताल के डीन डॉ. रमेश भारमल ने कहा कि वैक्सीन से क्रॉस इम्युनिटी मिलती है, लेकिन यह कोरोना से लड़ने में किस हद्द तक और कितना प्रभावी है यह शोध का विषय है.

बॉम्बे अस्पताल के कंसल्टेंट फिजिशियन और प्राइवेट अस्पतालों के प्रमुख समन्वयक ने कहा कि अब तक के शोध यही कहते हैंं कि बीसीजी टीका कहींं न कहीं मददगार है, लेकिन इसका असर 40 से 45 उम्र तक रहता है.ऐसे में अधिक उम्र वालों को एक बूस्टर टीका लगवाना चाहिए. हालांकि अभी तक यह 100 प्रतिशत स्पष्ट नहीं हुआ है.


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