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नवी मुंबई : नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग में जारी आन्दोलन की लहर नवी मुंबई के खारघर तक आ पहुंची है. यहां सेक्टर 30 में दर्जनों अल्पसंख्यक 3 दिनों से सड़क पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. धरने का नेतृत्व कर रही एड.तरन्नुम सिद्धीकी ने कहा कि सीएए काला कानून है, जो सेक्यूलर देश में धर्म के आधार पर लोगों को बांटने की साजिश है. उन्होंने पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बयानों में भिन्नता का हवाला देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार नागरिकता संशोधन कानून की आड़ में एनआरसी लागू करना चाहती है. यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है. इसलिए इस काले कानून को तत्काल रद्द करने की मांग कर रहे हैं.इस आन्दोलन के और तीव्र होने की संभावना है.

एड.तरन्नुम ने सीएम उद्धव ठाकरे के एनआरसी लागू नहीं करने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम राज्य सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि मोदी सरकार की मनमानी के खिलाफ सड़क पर उतरे हैं. हम माहौल को बिगाड़े बिना शांतिपूर्ण ढंग से आन्दोलन कर रहे हैं. इसलिए उद्धव सरकार को चाहिए कि वे अल्पसंख्यकों के हित में मदद करें, ताकि दूसरे लोग माहौल न बिगाड़ने पाएं. उन्होंने कहा कि यह आन्दोलन सिर्फ मुस्लिम समाज का नहीं, बल्कि उन सबके लिए है, जो इससे प्रभावित हो रहे हैं.

खारघर आन्दोलन में बैठे लोगों की मानें तो खारघर पुलिस सीएए के विरोध आन्दोलन को जल्द खत्म कराना चाहती है. एड. तरन्नुम ने कहा कि जहां-जहां आन्दोलन हो रहे हैं पुलिस दबाव बना रही है. उन्होंने कहा कि खारघर में अनशन के लिए निवेदन दिया था, लेकिन पुलिस ने परमिशन नहीं दी. हम संवैधानिक दायरे में अपनी आवाज उठा रहे हैं. फिर भी पुलिस उसे रोकना चाहती है. इस संदर्भ में संबंधित पुलिस अधिकारी से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गयी, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिल सका.

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