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मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को अवैध ढांचों को गिराए जाने पर स्थगन आदेश लगाए जाने को लेकर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि वह यह समझने में विफल है कि स्थानीय अदालतों ने रायगढ जिले में अलीबाग समुद्र तट के पास अवैध निजी ढांचों को गिराए जाने पर स्थगन आदेश क्यों जारी किए, जबकि यह स्पष्ट था कि संपत्तियां अवैध थीं। इस मामले में हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी।

मुख्य न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की खंडपीठ ने इन ढांचों को ध्वस्त करने में अपने कदम पीछे हटाने के लिए राज्य सरकार की भी खिंचाई की। अदालत एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कई धनाढ्य व्यक्तियों ने राज्य के और तटीय क्षेत्र प्राधिकरण के मानदंडों का उल्लंघन करते हुए अलीबाग में समुद्र तटों के किनारे बंगलों और निजी ढांचों का निर्माण किया है। इन ढांचों में भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी का समुद्र किनारे स्थित बंगला भी शामिल है। हाई कोर्ट के पिछले आदेशों के बाद स्थानीय अधिकारियों द्वारा बंगले को ध्वस्त कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश नंद्राजोग ने कहा, 'कैसे निचली अदालतों के न्यायाधीश स्थगन आदेश और यथास्थिति बनाये रखने के आदेश दे सकते हैं, जबकि संपत्ति के मालिक के पास वैध अनुमति नहीं हैं। हम यह समझने में विफल रहे हैं। निचली अदालतों को इस तरह के स्थगन आदेश नहीं देने चाहिए थे।' खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी कर प्रक्रिया में केवल देरी कर रही है। खंडपीठ को जब नीरव मोदी के बंगले को ध्वस्त किए जाने के बारे में सूचित किया गया तो मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'नीरव मोदी भारत वापस नहीं आना चाहता है, इसलिए सरकार ने पहले उसके ढांचे को ध्वस्त किया।'

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