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मुंबई : राज्य सरकार ने सहकारी गृह निर्माण संस्था की इमारतों के पुनर्विकास के संबंध में एक परिपत्र जारी किया है, इसके अनुसार संबंधित गृह निर्माण संस्था के 51 फीसदी सदस्यों की  अनुमति के बाद पुनर्विकास किया जा सकेगा। इसके पहले 75 फीसदी सदस्यों की अनुमति अनिवार्य थी। सरकार के इस निर्णय से कई सहकारी हाउसिंग सोसाइटियों के पुनर्विकास  को बढ़ावा मिल सकेगा। 

गृह निर्माण मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि मुंबई में अनेक ऐसी सोसाइटियां हैं, जिनका पुनर्विकास इसलिए नहीं हो पा रहा था, क्योंकि उनमें रहने वाले दो तिहाई लोग  सहमति नहीं दे रहे थे। लोगों की मांग थी कि दो-तिहाई की बजाय 50 प्रतिशत सहमति का नियम बनाया जाए, ताकि पुरानी व खतरनाक इमारतों, पुरानी चालियों और झोपड़पट्टी  क्षेत्रों का विकास किया जा सके। राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं को निर्धारित करते हुए एक परिपत्र जारी  किया है। परिपत्र में कहा गया है कि सहकारी हाऊसिंग सोसाइटियों के पुनर्विकास के लिए 51 फीसदी सदस्यों की अनुमति अनिवार्य होगी। परिपत्र में कहा गया है कि इमारत  पुनर्निमाण के लिए बुलाई गए विशेष सभा में यदि कोई सदस्य अनुपस्थित रहता है तो स्वीकृति, राय की तरफ ध्यान नहीं दिया जाएगा।

एक अनुमान के मुताबिक महाराष्ट्र में एक लाख से अधिक पंजीकृत हाउसिंग सोसाइटी है। इनमें से तकरीबन 60 हजार मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे और पालघर जिलों में है। सोसाइटियों  के पुनर्विकास में 75 फीसदी सदस्यों को अनुमति अनिवार्य थी, इतने लोगों की अनुमति लेना बड़ा कठिन कार्य था, लेकिन सरकार के इस निर्णय से अब हाऊसिंग सोसाइटियों का पुनर्विकास आसान होगा।


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