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मुंबई: देश के चर्चित एंटीलिया बम धमकी मामले में मुंबई पुलिस के बर्खास्त अधिकारी सचिन वाजे को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को सचिन वाजे को विशेष एनआईए अदालत से मिली जमानत रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता, आरोपी के प्रभावशाली संपर्कों और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी की रिहाई से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।

बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी की अपील स्वीकार करते हुए विशेष अदालत का आदेश निरस्त कर दिया। एनआईए ने 29 सितंबर 2026 को दिए गए जमानत आदेश को चुनौती दी थी। एजेंसी का कहना था कि विशेष अदालत ने मामले के महत्वपूर्ण तथ्यों और आतंकवाद विरोधी कानून के कठोर प्रावधानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सचिन वाजे के खिलाफ उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया गंभीर अपराधों की ओर संकेत करती है। अदालत ने माना कि मामले को केवल किसी व्यक्ति को डराने या प्रसिद्धि हासिल करने की कोशिश के रूप में नहीं देखा जा सकता। आरोपों की प्रकृति और उनके संभावित प्रभाव को ध्यान में रखना जरूरी है। अदालत ने सचिन वाजे के पुलिस सेवा से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और प्रभावशाली व्यक्तियों से उनके संपर्कों का भी उल्लेख किया। खंडपीठ ने कहा कि आरोपी का प्रभाव सामान्य सरकारी कर्मचारी से अलग रहा है। ऐसी स्थिति में उनकी रिहाई से गवाहों या साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह मामला 25 फरवरी 2021 का है, जब उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के पास विस्फोटक सामग्री से भरी एक स्कॉर्पियो कार मिली थी। वाहन में जिलेटिन की छड़ें बरामद होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया था। इस घटना ने देशभर में सनसनी पैदा कर दी थी।

मामले की जांच के दौरान ठाणे के कारोबारी मनसुख हिरेन का नाम भी सामने आया था। संबंधित वाहन उनसे जुड़ा बताया गया था। इसके कुछ दिन बाद 5 मार्च 2021 को मनसुख हिरेन का शव ठाणे के पास मिला। उनकी संदिग्ध मौत के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया और विस्फोटक वाहन मिलने की घटना के साथ हत्या की भी जांच शुरू हुई। एनआईए ने अपनी जांच में आरोप लगाया कि सचिन वाजे ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक सामग्री से भरा वाहन रखने की साजिश रची थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इस घटना का उद्देश्य भय पैदा करना और बाद में मामले को सुलझाने का श्रेय हासिल करना था। एजेंसी ने मनसुख हिरेन की हत्या को भी कथित साजिश से जुड़ा बताया है।

इससे पहले सितंबर 2026 में विशेष एनआईए अदालत ने सचिन वाजे को जमानत देने का आदेश दिया था। अदालत ने मामले में आतंकवाद संबंधी प्रावधानों की प्रयोज्यता और लंबे समय से हिरासत में रहने जैसे पहलुओं पर विचार किया था। सचिन वाजे मार्च 2021 से हिरासत में हैं। विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ एनआईए ने तुरंत हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एजेंसी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने दलील दी कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना न्यायसंगत नहीं था।

वहीं सचिन वाजे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. एम. थोराट ने अदालत में कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी स्वीकार करने पर भी कथित घटनाओं को आतंकवादी कृत्य मानना उचित नहीं होगा। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी लगभग पांच वर्षों से जेल में हैं और मुकदमे की सुनवाई में देरी हो रही है। हाई कोर्ट ने इन दलीलों को जमानत देने के लिए पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से हिरासत में रहना एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है, लेकिन इस मामले की परिस्थितियों में केवल इसी आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। खंडपीठ ने कहा कि कानून के शासन और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना आवश्यक है। अदालत के अनुसार, यदि गंभीर आरोपों वाले मामलों में न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है, तो उसे ध्यान में रखना जरूरी है। हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद सचिन वाजे को इस मामले में जमानत के आधार पर रिहाई नहीं मिल सकेगी। अदालत के निर्णय से एनआईए की कानूनी स्थिति मजबूत हुई है, जबकि बचाव पक्ष को बड़ा झटका लगा है।


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