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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की प्रमुख नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी को लेकर लंबे समय से चल रही दल बदलने की अटकलों पर उनकी सफाई सामने आई है। सोशल मीडिया पर लगातार दावा किया जा रहा था कि प्रियंका चतुर्वेदी जल्द ही उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकती हैं। हालांकि, इन चर्चाओं को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया है कि भाजपा में शामिल होने की उनकी कोई योजना नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग केवल अपनी पोस्ट पर ज्यादा लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए मनगढ़ंत कहानियां तैयार कर रहे हैं। नक्शे देखें

भाजपा में जाने की अटकलों पर प्रियंका चतुर्वेदी की सफाई प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल करके अपनी तरफ से कहानियां जोड़ देते हैं, ताकि उनकी पोस्ट पर ज्यादा प्रतिक्रिया मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग झूठी खबरें फैलाकर पैसा कमाते हैं। ऐसे लोगों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी की रोजी-रोटी पर लात नहीं मारना चाहतीं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लंबे समय तक उनकी चुप्पी का गलत अर्थ निकाला गया।

चतुर्वेदी ने कहा कि वह अपने बारे में फैलाई जा रही खबरों को लेकर काफी समय से चुप थीं, लेकिन आज के दौर में चुप रहने को कमजोरी समझ लिया जाता है। उनकी इस प्रतिक्रिया को दल बदलने की चर्चाओं का स्पष्ट खंडन माना गया। राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद तेज हुई थीं चर्चाएं प्रियंका चतुर्वेदी के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें उस समय तेज हुई थीं, जब उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हुआ और उन्हें दोबारा उच्च सदन भेजने का मौका नहीं मिला।

इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि वह पार्टी नेतृत्व के फैसले से नाराज हो सकती हैं। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में यहां तक दावा किया गया कि वह भाजपा के संपर्क में हैं। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया। शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने मार्च 2026 में राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर स्पष्ट किया था कि राजनीतिक समीकरण अनुकूल नहीं होने के कारण प्रियंका चतुर्वेदी को दोबारा मौका नहीं मिल सका। उन्होंने कहा था कि परिस्थितियां अनुकूल होतीं तो उनके नाम पर विचार किया जाता।

कांग्रेस छोड़कर शिवसेना में हुई थीं शामिल प्रियंका चतुर्वेदी का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था। वह लंबे समय तक कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रहीं और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखती थीं। साल 2019 में उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर अविभाजित शिवसेना का दामन थाम लिया था। उस समय कांग्रेस के भीतर कुछ घटनाओं और पार्टी के फैसलों को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई थी। कांग्रेस छोड़ने के बाद तत्कालीन शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे ने उनका पार्टी में स्वागत किया था। बाद में शिवसेना ने उन्हें राज्यसभा भेजा। वह संसद में कई राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रहीं।

महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन के बाद भी प्रियंका चतुर्वेदी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के साथ बनी रहीं। उन्होंने पार्टी के पक्ष में लगातार अपनी बात रखी और राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा। शिवसेना यूबीटी में टूट की चर्चाओं के बीच बढ़ी हलचल महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के विभाजन के बाद से लगातार नेताओं के पाला बदलने की खबरें सामने आती रही हैं। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना यूबीटी के बीच राजनीतिक टकराव भी जारी है। जून 2026 में शिवसेना यूबीटी के कुछ सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें सामने आई थीं। हालांकि, संजय राउत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि पार्टी एकजुट है। ऐसे राजनीतिक माहौल में प्रियंका चतुर्वेदी के दल बदलने की चर्चाओं ने भी लोगों का ध्यान खींचा। हालांकि, उनकी ओर से इन खबरों का खंडन किए जाने के बाद भाजपा में शामिल होने संबंधी दावों को समर्थन नहीं मिला है। संजय राउत से मतभेद भी आए सामने इस बीच 20 अक्टूबर 2026 को प्रियंका चतुर्वेदी और शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत के बीच एक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर सार्वजनिक मतभेद भी सामने आए। अल्बानिया में हिंसक प्रदर्शनों से जुड़े संजय राउत के बयान पर चतुर्वेदी ने असहमति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ हिंसा को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर अलग-अलग विचारों को लेकर चर्चा बढ़ी। हालांकि, किसी मुद्दे पर सार्वजनिक असहमति को अपने आप में दल बदलने या पार्टी छोड़ने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।


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