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बीड। महाराष्ट्र के बीड जिले में पुलिस ने पांच साल पुराने अपहरण मामले को सुलझाते हुए मानव तस्करी और अवैध बाल विवाह से जुड़े एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। जिला पुलिस की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने वर्ष 2021 में लापता हुई एक लड़की का पता लगाकर उसे सुरक्षित मुक्त कराया है। घटना के समय पीड़िता की उम्र महज 13 वर्ष थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि किशोरी को कथित तौर पर अगवा करने के बाद बेच दिया गया था और बाद में उसका बाल विवाह भी कराया गया। इस मामले में दो महिलाओं और दो पुरुषों सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, यह मामला लंबे समय से अनसुलझा था। अलग-अलग जांच अधिकारियों ने कई बार मामले की पड़ताल की, लेकिन लड़की का सुराग नहीं मिल सका। आखिरकार एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने नई जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए पीड़िता को ढूंढ निकाला। 2021 में अचानक लापता हुई थी 13 साल की लड़की जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 में बीड जिले से एक 13 वर्षीय लड़की अचानक लापता हो गई थी। परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद शिवाजीनगर पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत अपहरण का मामला दर्ज किया गया।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की। शुरुआती दौर में विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान भी चलाया गया, लेकिन किशोरी का पता नहीं चल सका। समय बीतने के साथ परिवार की चिंता बढ़ती गई। मामला पुलिस के लिए भी चुनौती बना हुआ था। कई बार जांच हुई, लेकिन नहीं मिला सुराग लड़की के लापता होने के बाद पुलिस ने अलग-अलग स्तरों पर जांच की थी। मामले की जिम्मेदारी समय-समय पर विभिन्न जांच अधिकारियों को सौंपी गई। पुलिस ने बीड और महाराष्ट्र के अन्य जिलों में लड़की की तलाश की।

कई संभावित स्थानों पर पूछताछ भी की गई, लेकिन जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। बाद में यह मामला एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सौंपा गया। विशेष टीम ने पुराने दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारियों की दोबारा समीक्षा की। इसके बाद नए सुराग मिलने पर जांच आगे बढ़ाई गई। एक सूचना ने बदल दी जांच की दिशा पुलिस के अनुसार, एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को लड़की के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना मिली थी। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने बीड जिले की गेवराई तहसील के गोविंदवाड़ी गांव में कार्रवाई की योजना बनाई।

पुलिस टीम ने संबंधित स्थान पर पहुंचकर जांच की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने लड़की को सुरक्षित मुक्त कराया और दो पुरुषों तथा दो महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों ने रविवार को इस कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की। पांच लाख रुपये में बेचने की हुई थी कोशिश प्रारंभिक जांच में मानव तस्करी से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2021 में एक महिला ने कथित तौर पर लड़की का अपहरण किया था। इसके बाद उसे मुंबई में पांच लाख रुपये में बेचने की कोशिश की गई। हालांकि, पुलिस के मुताबिक यह सौदा पूरा नहीं हो सका। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर लड़की को दूसरे व्यक्ति को बेचने की योजना बनाई। जांच में सामने आई इन परिस्थितियों से पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने आर्थिक लाभ के उद्देश्य से किशोरी की तस्करी की थी। एक लाख रुपये में किया गया सौदा पुलिस के अनुसार, मुंबई में पांच लाख रुपये का सौदा पूरा नहीं होने के बाद छत्रपति संभाजीनगर की एक अन्य महिला की भूमिका सामने आई। आरोप है कि इस महिला ने लड़की को बीड जिले के गोविंदवाड़ी गांव के एक व्यक्ति को एक लाख रुपये में बेच दिया। पुलिस ने इस संबंध में आरोपियों की कथित भूमिका की जांच शुरू की है। यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि लेनदेन में किन लोगों की भागीदारी थी और क्या आरोपियों ने पहले भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया था। हालांकि, अन्य मामलों में इस गिरोह की संलिप्तता की अभी पुष्टि नहीं हुई है। तीन साल पहले कराया गया बाल विवाह जांच में एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, करीब तीन साल पहले आरोपियों ने पीड़िता का अवैध रूप से बाल विवाह करा दिया था। यह विवाह छत्रपति संभाजीनगर जिले के पैठण स्थित एक मठ में कराए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि किशोरी की उम्र विवाह के लिए कानूनी रूप से निर्धारित न्यूनतम आयु से कम थी। इस मामले में बाल विवाह की व्यवस्था कराने वाले व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। दो महिलाओं और दो पुरुषों की गिरफ्तारी पुलिस ने मामले में कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। सभी को गोविंदवाड़ी क्षेत्र से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अपहरण, कथित खरीद-बिक्री और बाल विवाह की पूरी घटनाक्रम श्रृंखला का पता लगाया जा रहा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि लड़की को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में किसने सहायता की थी। आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर होगी। मानव तस्करी से जुड़े नेटवर्क की जांच इस मामले में एक से अधिक व्यक्तियों की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस कथित गिरोह के संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है। जांच अधिकारियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि पीड़िता को अगवा करने से लेकर उसका विवाह कराने तक किन-किन लोगों की भागीदारी रही। इसके अलावा कथित सौदे से संबंधित आर्थिक लेनदेन और अन्य संपर्कों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना जरूरी मानव तस्करी और बाल विवाह जैसे मामलों में पीड़ित व्यक्तियों की पहचान और निजता की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में लड़की घटना के समय नाबालिग थी। इसलिए उसका नाम, पता या ऐसी अन्य जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए, जिससे उसकी पहचान उजागर हो। पीड़िता की सुरक्षा के साथ आवश्यक चिकित्सकीय, मनोवैज्ञानिक और कानूनी सहायता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक शोषण या नियंत्रण की परिस्थितियों में रहने वाले पीड़ित व्यक्तियों को सुरक्षित पुनर्वास और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता हो सकती है। बाल विवाह और मानव तस्करी गंभीर अपराध भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है।


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