महाराष्ट्र में खुले मसालों की बिक्री पर प्रतिबंध, फिर भी बाजारों में बिक रही हल्दी-मिर्च
पुणे। महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने और आम नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। राज्यभर में खुले और बिना पैकिंग वाले मसाला पाउडर तथा मिश्रित मसालों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके बावजूद पुणे के पेठ बाजारों के कुछ हिस्सों में हल्दी और लाल मिर्च पाउडर की खुले में बिक्री जारी होने की जानकारी सामने आई है। दुकानदार कम कीमत, ग्राहकों की मांग और पहले से मौजूद स्टॉक का हवाला देकर इन मसालों की बिक्री कर रहे हैं। इस बीच एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे ने 15 अक्टूबर को राज्यव्यापी आदेश जारी कर मसाला उत्पादकों, व्यापारियों और विक्रेताओं को नए खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का उद्देश्य मसालों में मिलावट, संदूषण और प्रतिबंधित रासायनिक रंगों के इस्तेमाल को रोकना है।
प्रतिबंध के बावजूद पुणे के बाजारों में बिक रहे खुले मसाले पुणे के पारंपरिक पेठ बाजारों में हल्दी, लाल मिर्च और अन्य मसालों की बिक्री लंबे समय से होती रही है। यहां कई ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार कम मात्रा में मसाले खरीदते हैं। राज्य सरकार की ओर से खुले मसाला पाउडर की बिक्री प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद कुछ दुकानों पर हल्दी और लाल मिर्च पाउडर खुले रूप में बेचे जाने की जानकारी सामने आई है।
दुकानदारों का कहना है कि खुले मसालों की कीमत पैकिंग वाले उत्पादों की तुलना में कम होती है। इसलिए बड़ी संख्या में ग्राहक इन्हें खरीदना पसंद करते हैं।
इसके अलावा व्यापारियों के पास पहले से मौजूद स्टॉक भी बिक्री जारी रखने का एक कारण बताया जा रहा है। हालांकि, नया आदेश लागू होने के बाद खाद्य कारोबारियों को निर्धारित पैकिंग और सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है। 15 अक्टूबर को FDA आयुक्त ने जारी किया आदेश महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंडे ने 15 अक्टूबर 2026 को मसालों के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री से संबंधित निर्देश जारी किए।
आदेश के अनुसार, मसाला पाउडर और मिश्रित मसालों को उत्पादन स्थल पर ही पैक और सील करना अनिवार्य होगा। बिना पैकिंग और सीलिंग के ऐसे उत्पादों का वितरण तथा बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मसाले उपभोक्ताओं तक सुरक्षित स्थिति में पहुंचें और उत्पादन से बिक्री तक उनकी गुणवत्ता की निगरानी की जा सके। एफडीए ने सभी खाद्य कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
हल्दी, मिर्च और गरम मसाले पर लागू होंगे नियम नए दिशा-निर्देश केवल हल्दी और लाल मिर्च पाउडर तक सीमित नहीं हैं। इनके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के पिसे हुए और मिश्रित मसाले शामिल हैं। इनमें धनिया, जीरा, काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, इलायची, हींग, केसर, खसखस, गरम मसाला और करी पाउडर जैसे उत्पाद भी शामिल हैं। एफडीए का उद्देश्य मसालों की आपूर्ति व्यवस्था में स्वच्छता, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। इन निर्देशों का पालन निर्माताओं के साथ थोक विक्रेताओं, खुदरा व्यापारियों, ऑनलाइन विक्रेताओं, होटलों, भोजनालयों और कैटरिंग व्यवसायों को भी करना होगा। मसालों में खतरनाक रंगों की मिलावट पर सख्ती खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मसालों में प्रतिबंधित रंगों और हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल को लेकर भी चेतावनी दी है। एफडीए के अनुसार, जांच के दौरान मसालों के कुछ नमूनों में सूडान डाई, मेटानिल येलो और लेड क्रोमेट जैसे औद्योगिक रंग पाए गए थे। इन पदार्थों का इस्तेमाल खाद्य उत्पादों में करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। विशेष रूप से मसालों को अधिक चमकीला और आकर्षक दिखाने के लिए प्रतिबंधित रंगों का इस्तेमाल चिंता का विषय है। आयुक्त तुकाराम मुंडे ने ऐसे पदार्थों के उपयोग पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। मसालों को खुले में सुखाने पर भी रोक एफडीए ने मसालों के उत्पादन और भंडारण में स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सड़क किनारे, नालियों और कचरा जमा होने वाले स्थानों के आसपास मसाले सुखाने तथा अस्वच्छ परिस्थितियों में उनका भंडारण करने पर रोक लगाई गई है। ऐसे स्थानों पर मसाले रखने से धूल, गंदगी और हानिकारक सूक्ष्मजीवों के संपर्क में आने का खतरा बढ़ सकता है। मसालों को कीटाणुरहित करने के लिए एथिलीन ऑक्साइड के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। एफडीए ने खाद्य कारोबारियों को स्वच्छ उत्पादन प्रक्रिया और सुरक्षित भंडारण व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए हैं। पैकिंग और लेबलिंग में पारदर्शिता जरूरी नए नियमों के अनुसार, मसाला उत्पादों की पैकिंग और लेबलिंग पर विशेष ध्यान देना होगा। पैकिंग के जरिए उपभोक्ताओं को उत्पाद के निर्माता, सामग्री और अन्य आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना संभव होता है। इससे किसी उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर शिकायत सामने आने पर उसकी आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाने में मदद मिल सकती है। खाद्य कारोबारियों को वैध लाइसेंस रखने और कर्मचारियों के लिए स्वच्छता तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस व्यवस्था से मसाला उद्योग में जवाबदेही बढ़ाने की उम्मीद है। नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई एफडीए ने स्पष्ट किया है कि नए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले खाद्य कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें संबंधित उत्पादों की जब्ती, लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण और कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है। दंड की प्रकृति उल्लंघन की गंभीरता और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी। खाद्य सुरक्षा विभाग मसाला निर्माताओं और विक्रेताओं की निगरानी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजारों में बिकने वाले मसाले निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों। छोटे व्यापारियों के सामने नई चुनौती खुले मसालों की बिक्री पर प्रतिबंध का असर छोटे दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों पर पड़ सकता है। कई छोटे व्यापारी लंबे समय से बिना ब्रांड वाली हल्दी, मिर्च और अन्य मसाले ग्राहकों को उनकी मांग के अनुसार बेचते रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे कारोबारियों को पैकिंग और आपूर्ति के निर्धारित मानकों के अनुसार अपने व्यापार में बदलाव करना होगा। वहीं, ग्राहकों के सामने भी खुले और पैकिंग वाले मसालों की कीमतों में अंतर का सवाल हो सकता है। हालांकि, खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से सरकार ने पैकिंग और गुणवत्ता नियंत्रण को प्राथमिकता दी है।
ग्राहकों को मसाले खरीदते समय सतर्क रहने की सलाह
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में उपभोक्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। मसाले खरीदते समय पैकिंग की स्थिति, निर्माण और समाप्ति तिथि तथा खाद्य सुरक्षा से संबंधित जानकारी की जांच करना उपयोगी हो सकता है। असामान्य रंग, गंध या गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग से शिकायत की जा सकती है। महाराष्ट्र एफडीए ने खाद्य पदार्थों से संबंधित शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1800222365 और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। खाद्य सुरक्षा को लेकर बढ़ेगी निगरानी महाराष्ट्र में खुले मसाला पाउडर की बिक्री पर प्रतिबंध के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की चुनौती है। पुणे के पेठ बाजारों में प्रतिबंध के बावजूद खुले मसालों की बिक्री जारी होने की जानकारी इस चुनौती को उजागर करती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एफडीए के नए निर्देशों का पालन बाजारों में किस स्तर तक किया जाता है। सरकार का उद्देश्य मसालों में मिलावट रोकना, असुरक्षित उत्पादन प्रक्रियाओं पर नियंत्रण रखना और उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराना है।