महायुति सरकार पर निशाना: किसानों की मदद के नाम पर 'सामना' ने कसा तंज
मुंबई : शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने शुक्रवार को देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने किसानों के लिए 5,000 रुपये और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए 2,000 रुपये की त्योहारी आर्थिक सहायता को कामकाजी वर्ग का "अपमान" करार दिया। पार्टी ने कहा कि बढ़ती महंगाई और भीषण सूखे के बीच, घोषित किया गया यह पैकेज एक क्रूर मजाक से कम नहीं है। इसे "दीवाली उपहार" बताकर, फडणवीस सरकार ने साबित कर दिया है कि उसकी "बुद्धि दिवालिया" हो चुकी है।
पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में ठाकरे गुट ने कहा कि राज्य के 300 से अधिक तालुकों को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। वहां ग्रामीण परिवार पानी की भारी किल्लत, खरीफ और रबी की फसलों की बर्बादी और बढ़ते कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं। ठोस राहत देने के बजाय, प्रशासन केवल बैठकें कर रहा है और खोखले वादे कर रहा है। संपादकीय में बताया गया है कि किसानों को दिए जा रहे 5,000 रुपये कोई विशेष अनुदान नहीं हैं, बल्कि यह केंद्र सरकार से मिलने वाली संभावित धनराशि में से ही एक 'एडवांस' (अग्रिम भुगतान) है। सरकार की आलोचना करते हुए कहा गया कि उसने इस एडवांस भुगतान को एक उदार "दीवाली उपहार" के रूप में पेश किया है, ताकि वह बिना हक के इसका श्रेय ले सके।
संपादकीय में सवाल उठाया गया कि इतनी भारी महंगाई के दौर में, इतनी छोटी सी रकम से कोई परिवार त्योहार कैसे मना सकता है या अपनी बुनियादी जरूरतें और कपड़े कैसे खरीद सकता है? इसे किसानों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मुश्किलों का मजाक उड़ाना बताया गया। संपादकीय में तंज कसा गया, "गरीबों के जख्मों पर नमक कैसे छिड़कना है, यह तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ही सीखना चाहिए। सूखे की आग धधक रही है, लोग और मवेशी झुलस रहे हैं, और सरकार सूखे के नाम पर केवल बैठकों और घोषणाओं की बौछार कर रही है। असल में, यह मामला कुछ ऐसा है कि मदद तो बहुत मामूली है, लेकिन उसका प्रचार-प्रसार बहुत बढ़ा-चढ़ाकर किया जा रहा है।"
संपादकीय में आगे कहा गया कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने सूखा प्रभावित लोगों पर बहुत बड़ा "एहसान" किया है। "इस 'उदार' सहायता का इतना ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि लोग शायद 5,000 रुपये की इस रकम को 5 लाख रुपये समझ बैठें।" "फडणवीस और उनके साथियों को शायद लगता होगा कि यह 5,000 रुपये की मदद किसानों के जीवन में खुशियों की लहर ला देगी, किसान परिवारों को खुशहाल बना देगी और उनकी दिवाली को और भी मीठा कर देगी। अगर उन्हें लगता है कि इस 5,000 रुपये की मदद से 1.25 करोड़ किसानों को फायदा होगा, तो इसका मतलब है कि वे ग्रामीण महाराष्ट्र के बर्बाद हो चुके किसानों की दयनीय हालत से बिल्कुल अनजान हैं," इसमें टिप्पणी की गई।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने राज्य के वित्तीय आवंटन में भारी अंतर को उजागर किया। उन्होंने बताया कि 'सेवा संकल्प अभियान' जैसे कार्यक्रमों के लिए जिलों को 50 लाख रुपये जैसी बड़ी रकम दी जाती है, जबकि सूखे की मार झेल रहे किसानों और ज़मीनी स्तर पर काम करने वालों को बहुत ही मामूली रकम दी जाती है। संपादकीय में कहा गया, "यह कोई मदद नहीं है; बल्कि यह उनकी बदहाली का मज़ाक उड़ाना और चल रहे सूखे पर एक क्रूर मज़ाक है।" यह टिप्पणी ग्रामीण महाराष्ट्र में फैली व्यापक नाराजगी को दर्शाती है।