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मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त(सीईसी) ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने रविवार को देश के कई राज्यों में व्यापक रूप ले लिया। मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में भारी तादाद में प्रदर्शनकारी जुटे, जिससे पूरा इलाका नारों और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती से छावनी में तब्दील हो गया।

इस प्रदर्शन की अगुवाई शिवसेना (यूबीटी) के आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के अमित ठाकरे ने संयुक्त रूप से की। दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की।

हिरासत में लिए गए दर्जनों प्रदर्शनकारी

शिवसेना भवन के निकट अमित ठाकरे पुलिस वैन की छत पर चढ़ गए और भीड़ को संबोधित करते हुए घोषणा की कि आंदोलन सोमवार से और अधिक उग्र होगा। वहीं, आदित्य ठाकरे ने मौजूदा हालात की तुलना अघोषित आपातकाल से की और इसे भाजपा बनाम भारत की लड़ाई करार दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, यह संघर्ष जारी रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में भारी सुरक्षा बलों और बीएसएफ की तैनाती पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर नागरिकों के खिलाफ इन्हें क्यों तैनात किया गया है। प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

महाराष्ट्र, गोवा और दक्षिण भारत में बढ़ता विरोध

विरोध की यह आंच अन्य राज्यों में भी तेजी से फैली। पुणे में सीजेपी के 85 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, जहां प्रदर्शनकारियों ने सरकार से तानाशाही रवैया छोड़ते हुए एसआईआर को रद्द करने की मांग उठाई। गोवा की राजधानी पणजी में इनफ इज इनफ अभियान के समर्थन से विरोध मार्च निकाला गया।

वहां पार्षद जैक सुखीजा समेत सात लोगों को हिरासत में लेने के बाद हाईकोर्ट में तत्काल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई गई, जिसके बाद अदालत ने उनकी रिहाई का आदेश दिया।

उधर, हैदराबाद के धरना चौक पर लगभग 100 कार्यकर्ता जुटे, जबकि बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में 300 से अधिक लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।

विपक्षी लामबंदी पर क्या है भाजपा का रुख?

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और वामदलों ने साझा रूप से नए चुनाव कराने की मांग की। सांसद सौगत रॉय ने कहा कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी में है, जिसके लिए जमीन पर व्यापक जन-आंदोलन खड़ा किया जा रहा है।

वहीं, केरल की विधानसभा में सोमवार को एक आधिकारिक प्रस्ताव पेश किया जाना तय हुआ है, जिसका मकसद एसआईआर प्रक्रिया से बाहर किए गए मतदाताओं को दोबारा शामिल करना और सीईसी को पद से हटाना है।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इन सभी प्रदर्शनों को पूरी तरह खारिज किया है। भाजपा नेता दिलीप घोष ने इसे महज एक राजनीतिक फैशन बताते हुए विपक्ष के इस रुख पर तंज कसा।

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