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2 मई से कच्‍चे तेल को लेकर भारत और चीन की टेंशन बढ़ने वाली है. दरअसल, बीते दिनों अमेरिका ने ईरान से कच्‍चा तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगा दिया था. इस प्रतिबंध का सबसे ज्‍यादा असर भारत और चीन पर पड़ने वाला है. आइए जानते हैं कि कैसे अमेरिका के इस एक फैसले की वजह से भारत और चीन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
दरअसल, भारत अपनी जरुरत का करीब 12 फीसदी कच्चा तेल ईरान से खरीदता है. अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारत अब ईरान से कच्‍चे तेल खरीदना बंद कर सकता है.
इसके बाद भारत को नए देशों से तेल खरीदना होगा जो महंगा सौदा साबित हो सकता है. इसके अलावा अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने की आशंका है. इसका असर यह होगा कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी आएगी.
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी की वजह से महंगाई भी बढ़ने की आशंका है. जाहिर सी बात है कि महंगाई बढ़ने से आम आदमी की मुश्किलें बढ़ेंगी. वहीं, देश की आर्थिक ग्रोथ पर भी इसका निगेटिव असर होगा.
क्‍यों अमेरिका ने लगाया ईरान पर बैन
परमाणु समझौते के उल्‍लंघन को लेकर अमेरिका ने बीते साल ईरान पर व्‍यापार से जुड़े प्रतिबंध लगा दिए. हालांकि, अमेरिका ने चीन , भारत , जापान , दक्षिण कोरिया , ताइवान , तुर्की, इटली और यूनान को 6 महीने प्रतिबंध से छूट दी थी. .
मतलब यह कि इन देशों को 6 महीने की मोहलत मिल गई. इसके साथ ही अमेरिका ने इन सभी देशों को ईरान से आयात किये जाने वाले कच्चे तेल में कटौती को भी कहा था. यह छूट नवंबर 2018 में शुरू हुई थी और दो मई को समाप्त हो गई है
बता दें कि इराक ने अप्रैल 2018 से मार्च 2019 के दौरान भारत को 4.66 करोड़ टन कच्चा तेल बेचा. यह वित्त वर्ष 2017-18 के 4.57 करोड़ टन की तुलना में 2 फीसदी अधिक है.  सऊदी अरब पारंपरिक तौर पर भारत को तेल की आपूर्ति करने वाला शीर्ष देश है लेकिन 2017-18 में पहली बार इराक ने सऊदी अरब का स्थान छीन लिया था.
सऊदी अरब ने 2018-19 में 4.03 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया, जो कि 2017-18 में 3.61 करोड़ टन तेल के आयात से अधिक है. ईरान भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है.



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