Latest News

मुंबई:  ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए शुरू की गई मराठी भाषा परीक्षा अब चर्चा का विषय बन गई है। राज्य परिवहन विभाग की ओर से शुरू किए गए इस अभियान के पहले ही दिन बड़ी संख्या में चालक मराठी भाषा की परीक्षा में सफल नहीं हो पाए। आरटीओ अधिकारियों ने जांच के दौरान कई चालकों से मराठी में बातचीत की और यात्रियों से जुड़े रोजमर्रा के सवाल पूछे। इस प्रक्रिया में 1200 से अधिक चालक तय मानकों पर खरे नहीं उतर पाए।

जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो रिक्शा, टैक्सी और अन्य सार्वजनिक यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान जरूरी किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चालक यात्रियों से आसानी से संवाद कर सकें और स्थानीय भाषा समझने में सक्षम हों। इसके तहत आरटीओ की टीमों ने सड़क पर ही चालकों की भाषा क्षमता की जांच शुरू की।

इस मराठी टेस्ट में चालकों से कुल 16 सवाल पूछे गए। सवाल बेहद सामान्य बातचीत से जुड़े थे, जिनमें यात्री से गंतव्य पूछना, किराया बताना, रास्ते की जानकारी देना, समय बताना और डिजिटल भुगतान जैसे विषय शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा का उद्देश्य कठिन भाषा ज्ञान की जांच करना नहीं, बल्कि यात्रियों के साथ संवाद करने की क्षमता को परखना है।

मुंबई महानगर क्षेत्र में आरटीओ की टीमों ने बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी चालकों की जांच की। जांच के दौरान कई चालक मराठी में पूछे गए सामान्य सवालों का जवाब नहीं दे पाए। ऐसे चालकों को नोटिस जारी कर सुधार का मौका दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उन्हें दोबारा भाषा सीखकर परीक्षा में शामिल होना होगा। परिवहन विभाग की इस कार्रवाई के बाद ऑटो-टैक्सी चालकों में चिंता बढ़ गई है। कई चालकों का कहना है कि वे वर्षों से महाराष्ट्र में काम कर रहे हैं, लेकिन अब अचानक भाषा परीक्षा के कारण उनके रोजगार पर असर पड़ सकता है। कुछ यूनियनों ने भी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। 

Weather Forecast

Advertisement

Live Cricket Score

Stock Market | Sensex

Advertisement