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मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्यभर में बिक रहे ‘एनालॉग पनीर’ पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। कार्रवाई के दौरान ५५.७२ करोड़ रुपए मूल्य का २८.६६ लाख किलोग्राम संदिग्ध एनालॉग पनीर और संबंधित सामग्री नष्ट कर दी गई, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले १६५ प्रतिष्ठानों के लाइसेंस भी रद्द कर दिए गए हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे ने साफ कहा कि ‘जनता की सेहत से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’

एफडीए की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। राज्यभर से पनीर के ३०८ नमूने जांच के लिए लिए गए थे, जिनमें ८९ नमूने सब-स्टैंडर्ड और ३८ नमूने असुरक्षित पाए गए। यानी करीब ३२ प्रतिशत नमूने गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद सरकार ने ३० जुलाई को अधिसूचना जारी कर एनालॉग पनीर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।

मुंढे ने बताया कि एनालॉग पनीर दूध से नहीं, बल्कि वनस्पति वसा और अन्य गैर-दुग्ध सामग्री से तैयार किया जाता है। इससे स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यही कारण है कि राज्य में फिलहाल एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि और बढ़ाई जा सकती है। एफडीए अब राज्यभर में विशेष जांच अभियान चलाने जा रहा है। गोदामों, उत्पादन इकाइयों, वितरकों, परिवहनकर्ताओं और होटलों की व्यापक जांच होगी। संदिग्ध पनीर के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई जाएगी और मिलावटी या प्रतिबंधित एनालॉग पनीर का उपयोग करते पाए जाने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मुंढे ने स्पष्ट किया कि अब होटल, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों को केवल दूध से बने वास्तविक पनीर का ही उपयोग करना होगा, अन्यथा उन पर कार्रवाई होगी।


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