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मुंबई :नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी मानें जाने वाले इंटरनेशनल ड्रग तस्कर सलीम इस्माइल डोला को गिरफ्तार किया, जिसे आज गुरुवार (30 अप्रैल, 2026) को मुंबई की विशेष कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी ड्रग तस्कर सलीम डोला को अगले हफ्ते शुक्रवार (8 मई, 2026) तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया है. इस दौरान एजेंसी उससे गहन पूछताछ कर अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी है.

2023 से फरार चल रहा था सलीम डोला

सलीम डोला साल 2023 से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था. सोमवार-मंगलवार (27-28 अप्रैल, 2026) की दरमियानी रात को जैसे ही उसे विदेश से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लाया गया, वैसे ही इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया.

औपचारिक गिरफ्तारी के बाद एनसीबी सलीम को मुंबई लेकर गई

इसके बाद मंगलवार (28 अप्रैल) को शाम 4:15 बजे सलीम डोला को एनसीबी मुख्यालय, नई दिल्ली में एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया. इसके बाद दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड लेकर उसे मुंबई लाया गया, जहां विशेष अदालत में पेश करने के बाद एनसीबी को उसकी कस्टडी सौंप दी गई.

एनसीबी ने अदालत को बताया कि सलीम डोला सिर्फ एक सप्लायर नहीं, बल्कि दाऊद इब्राहिम के अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का एक अहम स्तंभ है. जांच के मुताबिक, डोला विदेशों में बैठकर भारत के कई राज्यों में मेफेड्रोन की सप्लाई का संचालन कर रहा था और पूरे नेटवर्क को रिमोट तरीके से नियंत्रित करता था.

एनसीबी ने कोर्ट को दी मुंबई में हुई छापेमारी की जानकारी

एनसीबी ने कोर्ट को बताया कि मुंबई के डोंगरी ड्रग मामले में पकड़े गए मुख्य आरोपी फैसल शेख का सीधा संपर्क डोला से था. वह व्हाट्सएप कॉल के जरिए डोला से निर्देश लेता था और उसी के इशारे पर मुंबई में ड्रग्स का नेटवर्क चला रहा था. जून 2023 में एनसीबी की मुंबई जोनल यूनिट ने डोंगरी इलाके में दो अलग-अलग छापेमारी के दौरान करीब 20 किलोग्राम मेफेड्रोन  बरामद किया था. इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों आशिक अली, नासिर खान और अल्फिया शेख ने पूछताछ में खुलासा किया था कि पूरे सिंडिकेट के पीछे सलीम डोला का हाथ है.

एजेंसी ने आगे कहा कि ड्रग्स की डिलीवरी मुंबई के जेजे अस्पताल के पास स्थित भीड़भाड़ वाले इलाकों में की जाती थी, जहां अलमास होटल जैसे स्थानों पर व्हाट्सएप कॉल के जरिए डील फिक्स होती थी.

एनसीबी की रिमांड रिपोर्ट में सामने आए बेहद चौंकाने वाले आंकड़े

रिमांड रिपोर्ट के मुताबिक, हर महीने करीब 40 किलो मेफेड्रोन की सप्लाई.

खरीद दर: 7 लाख रुपये प्रति किलो

बिक्री दर: 18 लाख रुपये प्रति किलो तक

मुनाफा: हर महीने करीब 40 से 50 लाख रुपये का शुद्ध फायदा

इस तरह यह पूरा ड्रग सिंडिकेट हर महीने करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार कर रहा था.

एनसीबी की जांच में क्या हुआ खुलासा?

एनसीबी की वित्तीय जांच में यह भी सामने आया है कि इस ड्रग नेटवर्क ने अवैध कमाई से करीब 6.40 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति बनाई थी. इन संपत्तियों को  सफेमा के तहत फ्रीज कर दिया गया है. यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि एजेंसी अब सिर्फ गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि आर्थिक नेटवर्क को भी तोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है.

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