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मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने लव अफेयर्स से बने शारीरिक संबंध और शादी का वादा पूरा नहीं होने पर दर्ज केस को लेकर एक बहुत ही बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को 'टॉर्चर' नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने एक युवक के खिलाफ टॉर्चर और पॉक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) के तहत दर्ज केस को रद्द करने का आदेश दिया है।  

क्या है पूरा मामला?

इस मामले में शिकायत करने वाली लड़की और आरोपी एक-दूसरे के रिश्तेदार हैं और उनके बीच कुछ समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। शुरू में दोनों ने शादी करने का फैसला किया था। लेकिन दोनों परिवारों के कड़े विरोध के कारण उनकी शादी नहीं हो सकी। इस विवाद के कारण बाद में संबंधित युवक के खिलाफ क्रांति चौक पुलिस स्टेशन में इंडियन पीनल कोड और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। 

कोर्ट ने क्या कहा?

आरोपी ने इस केस के खिलाफ औरंगाबाद बेंच में पिटीशन फाइल की थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एस जी चपलगांवकर ने पूरे केस को करीब से देखा। कोर्ट ने कहा कि शिकायत दर्ज कराते समय लड़की की उम्र 18 साल से ज्यादा थी। दोनों बालिग हैं और उनके बीच शारीरिक संबंध सिर्फ शादी के झूठे वादे पर नहीं, बल्कि आपसी सहमति से बने थे। जांच से यह साफ हो गया कि शादी न करने की वजह झूठा वादा नहीं, बल्कि परिवार का विरोध था।

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