राहुल का सरकार पर वार: 'चीन हमारे सामने आ रहा था..तब कहां थी 56 इंच की छाती, राष्ट्रीय सुरक्षा अहम मुद्दा'
नई दिल्ली : संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के हवाले से चीन की सेना की ओर से घुसपैठ का दावा किया। इस बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत तमाम केंद्रीय मंत्रियों ने आपत्ति जताई। इसकी वजह से लोकसभा का सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान जोरदार हंगामा देखने को मिला। राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देते हुए कहा कि डोकलाम में चार चीनी टैंक भारत की सीमा में पहुंच गए थे। राहुल गांधी के दावे पर का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने जोरदार विरोध किया था। जिसके बाद सदन में काफी हंगामा देखने को मिला।
राहुल गांधी के संबोधन के दौरान लोकसभा कई बार स्थगित करनी पड़ी। लगातार हो रहे हंगामे को देखते हुए चेयर पर आसीन सांसद जगदंबिका पाल ने सदन को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पता नहीं सरकार क्यों डर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सच छुपा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा जरूरी है।
प्रधानमंत्री मोदी पर राहुल गांधी ने साधा निशाना
नेता विपक्ष ने मीडिया से कहा, 'मैं सुरक्षा के मुद्दे पर सदन में बोलना चाहता था। पूर्व सेना प्रमुख ने राजनाथ सिंह से क्या कहा था। पता नहीं सरकार क्यों डरी हुई है। मैं पूर्व सेना प्रमुख की बात बताना चाहता था। नरवणेजी ने प्रधानमंत्री के बारे में, राजनाथ के बारे में एक आर्टिकल में लिखा है। मैं वो बोल रहा हूं, लेकिन मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है। चीन हमारे सामने आ रहा था। तब 56 इंच की छाती को क्या हुआ था?'
कांग्रेस सांसद ने कहा, 'मैं सदन में बोलना चाहता हूं। मुद्दा वही है जो प्रधानमंत्री और राजनाथ सिंह जी ने कहा। जमीन ली गई या नहीं, यह एक अलग सवाल है। हम उस पर बाद में बात करेंगे। लेकिन उससे पहले, देश के नेता को दिशा-निर्देश देने चाहिए। देश के नेता को फैसले लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए और फैसले दूसरों के कंधों पर नहीं छोड़ने चाहिए। प्रधानमंत्री ने यही किया है।'
राहुल गांधी ने पूछे ये सवाल?
राहुल गांधी ने कहा, 'मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है। मुझे सिर्फ दो-तीन लाइनें बोलनी हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। ये पूर्व सेना प्रमुख के शब्द हैं और यह वह बातचीत है जो उन्होंने राजनाथ सिंह जी और प्रधानमंत्री मोदी से की है। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि मैं सदन में वही कहना चाहता हूं जो पूर्व सेना प्रमुख ने लिखा है और राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें क्या आदेश दिए थे।'