मुंबई में उबर और ओला की हड़ताल से मुंबई की रफ्तार धीमी... यात्रियों को झेलनी पड़ी दिक्कतें
मुंबई : मुंबई में बुधवार को कैब एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म उबर और ओला के चालक लगातार दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे, जिससे महानगर में यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हड़ताल कर रहे चालकों की मांग है कि उन्हें भी मुंबई की लोकल टैक्सी सेवा (काली-पीली) द्वारा लिए जाने वाले शुल्क के समान एक बेस किराया मिले। इसके अलावा चालकों ने कमीशन कम करने और बाइक टैक्सी पर भी रोक लगाने की मांग की। बुधवार को शहर के नवी मुंबई इलाके में जोरदार तरीके से विरोध-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कई यात्रियों को जबरन कैब से उतर जाने के लिए भी कहा गया। बिज़नेस स्टैंडर्ड से बात करने वाले कई कैब चालकों ने इसकी पुष्टि की और बताया कि उन्होंने उन इलाकों की राइड नहीं ली, जहां विरोध-प्रदर्शन चल रहा था।
इसके अलावा बताया गया कि ओला और उबर के ऐप्लिकेशन पर कैब बुक करने में यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और रैपिडो ने काली-पीली श्रेणी में बड़ी संख्या में कैब का परिचालन किया। नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर रैपिडो के एक चालक ने कहा, ‘उबर और ओला काफी कमीशन लेते हैं। दूसरी ओर रैपिडो कोई कमीशन नहीं लेता है। इसके अलावा सबस्क्रिप्शन के अनुसार कोटा पूरा करने के बाद रैपिडो हमें दोबारा बुकिंग लेने की अनुमति देता है।’ मुंबई में काली-पीली कैब का बेस किराया 1.5 किलोमीटर की दूरी के लिए 31 रुपये है। उसके बाद प्रति किलोमीटर 20.6 रुपये लगते हैं। ओला और उबर जैसे कैब एग्रीगेटर कैब की श्रेणी के आधार पर बेस किराया तय करते हैं। इसमें कार का मॉडल, वह किस श्रेणी में आती है इसका ख्याल रखा जाता है।
मगर उद्योग के सूत्रों ने पुष्टि की है कि आना वाला मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश (एमवीएजी) इन कैब के लिए निश्चित शुल्क के पक्ष में नहीं हो सकता है। वाहन क्षेत्र के एक जानकार ने कहा, ‘मुंबई में जारी होने वाली मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश में बेस किराये पर 0.5 से 1.5 फीसदी सीमा दे सकती है। इनमें सर्ज (मांग अधिक होने पर वसूला जाने वाला शुल्क) भी शामिल है। प्रदर्शनकारी चालक निश्चित किराया चाहते हैं, लेकिन दिशानिर्देश भी शायद कैब चालकों के पक्ष में नहीं रहेगा। इसके अलावा हम यह भी समझ सकते हैं कि सरकार भी लचीली किराये के पक्ष में है।’
सरकार के निश्चित किराया के पक्ष में नहीं होने का एक कारण यह भी है कि इसके बाद चालक कुछ खास स्थान पर ही जाना चाहेंगे। उद्योग के जानकारों ने बताया अलग-अलग किराया चालक और यात्रियों दोनों के लिए सही होता है। हालांकि, इस बारे में जानकारी के लिए ओला और उबर को भेजे गए ईमेल का खबर प्रकाशित होने तक कोई जवाब नहीं मिला। इसके अलावा कैब चालकों की मांग में बाइक टैक्सी पर रोक लगाना भी शामिल हैं। महाराष्ट्र सरकार ने भी इस पर प्रतिबंध के लिए कहा है। एक अन्य सूत्र ने बताया, ‘कुछ कंपनियां बाइक टैक्सी सेवाएं बंद कर दी हैं, लेकिन कुछ अभी भी इसे चला रही हैं। वे ग्रे बॉलिंग तकनीक का उपयोग कर रही हैं और कुछ खास इलाकों में ही इसे चला रही हैं।’