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  विधानसभा की अंधेरी (पूर्व) सीट के लिए होने वाले उप चुनाव में बीजेपी के संभावित उम्मीदवार मूरजी पटेल का पत्ता क्या चुनाव से पहले ही कट सकता है? यह सवाल रविवार को शिंदे गुट के मुख्य प्रवक्ता दीपक केसरकर के एक बयान से उठ खड़ा हुआ है। दीपक केसरकर  ने रविवार को मीडिया से कहा कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि अंधेरी से कौन चुनाव लड़ेगा। यह फैसला शिंदे और फडणवीस मिलकर लेंगे। उन्होंने कहा कि आप लोग मूरजी पटेल का नाम तो ले रहे हैं, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। बता दें कि शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे  और बागी एकनाथ शिंदे गुट के बीच चुनाव आयोग  में चुनाव चिह्न के लिए जब शनिवार को जिरह हुई, तो उद्धव ने गुट यही तर्क दिया था कि जब अंधेरी उप चुनाव में शिंदे गुट अपना उम्मीदवार ही खड़ा नहीं कर रही, तो फिर फैसला लेने में इतनी जल्दबाजी की क्या जरूरत है।सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद से शिंदे गुट के कई नेता एकनाथ शिंदे पर अंधेरी पूर्व के उप चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने का दबाव बना रहे हैं। कहा जा रहा है कि केसरकर का यह बयान उसी दिशा का एक संकेत है। केसरकर का यह कहना भी एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि फैसला शिंदे और फडणवीस मिलकर लेंगे, क्योंकि अंधेरी पूर्व के कई उत्तर भारतीय बीजेपी नेता आज भी पटेल को उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर खुश नहीं हैं। यह नेता निजी बातचीत में कह रहे हैं कि पटेल बीजेपी के नहीं आशीष शेलार के उम्मीदवार हैं।ऐसे में अगर शिंदे गुट ने भी अपना उम्मीदवार उतारने पर जोर दिया, तो बीजेपी शिंदे गुट की यह युति पहले ही चुनाव में टूट जाएगी। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि अगर शिंदे गुट ने अपना उम्मीदवार उतारा, तो इसका फायदा बीजेपी को ही होगा, क्योंकि उद्धव गुट और शिंदे बीच दोनों को नया चुनाव चिह्न लेकर लड़ना होगा, दूसरे इन दोनों की लड़ाई से मराठी वोटों को बंटवारा तय है। हालांकि, शिवसेना की संभावित उम्मीदवार ऋतुजा लटके को उनके दिवंगत पति पूर्व विधायक रमेश लटके के प्रति क्षेत्र में व्याप्त सहानुभूति और मराठी वोटों के साथ-साथ बीजेपी विरोधी मुस्लिम-ईसाई और कांग्रेस-एनसीपी के वोट मिलने की भी संभावना जताई जा रही है।

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