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   उद्धव ठाकरे की शिवसेना BMC पर एकतरफा राज करती रही है। राज्य में कांग्रेस और NCP की सरकार आती और जाती रही, मगर शिवसेना का BMC पर दबदबा कायम रहा। ऐसे में बदले हुए सियासी माहौल में भाजपा का प्रयास राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) से हाथ मिलाकर शिवसेना से BMC छीनने का है।

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि BMC पर कब्जे का सीधा मतलब मुंबई पर राज करने और अपने सियासी प्रभुत्व को स्थापित करने का जरिया है। शिवसेना की जन्मस्थली ही मुंबई है। शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे ने पार्टी के जनाधार को सशक्त करने के लिए मुंबई के रेहड़ी-पटरी वालों के हक में आवाज बुलंद की। 1966 में शिवसेना का गठन हुआ और पांच वर्ष बाद ही 1971 में पार्टी BMC में डॉ एसएस गुप्ता को महापौर को बनाने में सफल रही थी। इसके बाद शिवसेना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

BMC पर 1985 में शिवसेना ने इतनी पकड़ मजबूत कर ली, कि फिर उसे कोई दोबारा से नहीं तोड़ सका। लेकिन अब राज्य के बदले सियासी माहौल में शिवसेना के इस मजबूत किले में बीजेपी ने सेंध लगाने की योजना तैयार की है, जिसके लिए राज ठाकरे को साथ लेने की कोशीशें की जा रहीं है।

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