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  महाराष्ट्र स्टेट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट की पूर्व प्रमुख रश्मि शुक्ला के खिलाफ जांच करने वाली कुलाबा पुलिस ने यह पाया है कि फडणवीस सरकार के कार्यकाल में असामाजिक तत्व बताकर राउत के फाेन की 60 दिन तक और खड़से के फाेन की 67 दिनाें तक टैपिंग की गई.पुलिस ने बुधवार काे कहा कि फडणवीस सरकार के कार्यकाल में स्टेट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट ने कुछ और लाेगाें के नाम असामाजिक तत्वाें की लिस्ट में डाल दिए थे. यह लिस्ट गृह विभाग काे भेजी गई थी और उसके बाद फाेन टैपिंग की मंजूरी दी गई थी. आराेप है कि रश्मि शुक्ला की ओर से यह टैपिंग 2019 के दाैरान कराई गई थी. महाराष्ट्र के पूर्व DGP संजय पांडे के आदेश के बाद मार्च के आखिरी हफ्ते में इस मामले में मुंबई की साइबर सेल में भी एक FIR रजिस्टर हुई थी.

रश्मि शुक्ला पर दर्ज है केस महाराष्ट्र SID की पूर्व प्रमुख रश्मि शुक्ला के खिलाफ दर्ज FIR के मुताबिक उन्हाेंने पद पर रहते हुए कई लाेगाें की फाेन टैपिंग करवाई्. इसमें कई बड़े नाम शामिल थे. इस मामले में रश्मि शुक्ला का बयान दाे बार दर्ज किया गया. जांच अधिकारियाें का आराेप है कि शुक्ला जांच में सहयाेग नही कर रही थीं.इसलिए अब जरूरत पड़ने पर फिर से उनका बयान दर्ज करवाने के लिए बुलाया जा सकता है. इसी मामले में मुंबई पुलिस ने उससमय के उड हाेम एस कुमार का भी बयान दर्ज किया है. कुमार ने अपने बयान में बताया कि उनके पास जाे डखऊ की तरह से फाेन टैपिंग की रिक्वेस्ट आई थी, उसमें एकनाथ खड़से और संजय राउत का नाम नहीं था. SID की तरफ से जाे रिक्वेस्ट गई थी वाे गलत नाम से गई थी, ताकि खड़से या राउत का फाेन टैप हाे रहा है, ये किसी काे पता न चले. इस मामले में पुलिस ने अब तक 10 से ज्यादा लाेगाें के बयान दर्ज किए हैं.

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