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पालघर : महाराष्ट्र के पालघर में हुए साधुओं के जघन्य हत्याकांड मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने तीन पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। महाराष्ट्र पुलिस के कोंकण रेंज के आईजी द्वारा यह कार्रवाई की गई है। दो पुलिसकर्मियों को कंपलसरी रिटायरमेंट ( एपीआई रविंद्र सालुंखे और हेड कॉन्स्टेबल नरेश ढोंडी) और एक पुलिसकर्मी ( एपीआई आनंदराव काले) को सेवा से बर्खास्त किया गया है। 

बर्खास्त किए गए इन पुलिस अधिकारियों पर अपनी ड्यूटी इमानदारी से ना निभाने और साधुओं को हमलावरों के हवाले करने के आरोप में सेवा से हमेशा के लिए बर्खास्त कर दिया गया है। इस घटना के बाद से ही पांच पुलिसकर्मियों पर जांच चल रही थी। और यह सभी उस समय से ही निलंबित चल रहे थे। पालघर की इस घटना ने महाराष्ट्र पुलिस की साख पर बट्टा लगाने का काम किया था। मामले में महाराष्ट्र पुलिस और महाराष्ट्र सरकार की तरफ से काफी लीपापोती भी हुई थी। हालांकि बाद में एक्शन लेते हुए 100 से भी ज्यादा लोगों को इस मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

महाराष्ट्र के पालघर जिले के गढ़चिंचले गांव सड़क पर 16 अप्रैल की रात 2 साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ में पीट-पीटकर निर्मम हत्या कर दी थी। भीड़ ने जूना अखाड़े के महाराज कल्पवृक्ष गिरी और सहायक सुशील गिरी महाराज समेत ड्राइवर निलेश तेलगड़े की हत्या की थी। भीड़ को यह शक था की गाड़ी में सवार तीनों व्यक्ति बच्चा चोर हो सकते हैं। बस इसी अफवाह ने भीड़ में सोए शैतान को जगा दिया और सबने मिलकर लाठी-डंडों से तीनों व्यक्तियों की जान ले ली। इस घटना के समय पुलिस को भी देखा गया था। वीडियो में साफ पता चल रहा था कि पुलिस ने अपनी ड्यूटी को ठीक से नहीं निभाया और निर्दोष साधुओं को हत्यारी भीड़ के हवाले कर दिया। महाराष्ट्र सरकार ने मामले की जांच स्टेट सीआईडी को सौंपी थी। घटना होने के बाद स्थानीय पुलिस की लापरवाही उजागर होने लगी। तब राज्य सरकार ने स्थानीय एसपी गौरव सिंह को भी अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया था। मामले में पुलिस ने 154 लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें 11 लोग नाबालिग हैं।

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