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मुंबई : कोरोना के इलाज के लिए अभी वैक्सीन बनी नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार ने कुछ दवाओं और इंजेक्शन को आपात स्थितियों में डॉक्टर की सिफारिश पर इस्तेमाल की इजाजत दी है। Tocilzumab (टोसिलिजुमैब) इंजेक्शन इनमें से एक है। इस इंजेक्शन की मुंबई में कालाबाजारी हो रही थी। डीसीपी अकबर पठान ने बताया कि हमने इस केस में आजम नसीर खान नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 15 इंजेक्शन जब्त किए हैं। 

दरअसल, सीनियर इंस्पेक्टर महेश देसाई, संजीव गावडे और सुधीर जाधव को टिप मिली थी कि दिल्ली से कोई व्यक्ति मुंबई में यह इंजेक्शन बेचने के लिए आया हुआ है। क्राइम ब्रांच ने अपने खबरी के जरिए इसका मोबाइल नंबर हासिल किया और फिर फर्जी ग्राहक बनकर उससे संपर्क किया। 

उससे कहा कि हमें दो इंजेक्शन अर्जेंट चाहिए। परिवार में दो लोगों के लिए यह बहुत जरूरी है। सामने वाले ने प्रति इंजेक्शन का रेट एक लाख रुपये बताया । फर्जी ग्राहक ने हां कर दी। जैसे ही सामने वाला यह इंजेक्शन लेकर आया, उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी सामान की तलाशी में कुल 15 इंजेक्शन मिले। वह 40 हजार रुपये के इंजेक्शन को एक लाख रुपये में बेच रहा था। जांच में यह बात सामने आई आरोपी आजम मूल रूप से उत्तराखंड के काशीपुर का निवासी है। दिल्ली से उसे किसी ने मुंबई में इस इंजेक्शन को बेचने के लिए भेजा था, क्योंकि मुंबई में भी दिल्ली की तरह कोरोना का संक्रमण सबसे ज्यादा है। 

आजम ने बताया कि यह इंजेक्शन स्वीट्जरलैंड से भारत में किसी बड़ी दवा कंपनी द्वारा मंगाया जाता है और फिर डिस्ट्रिब्यूटर्स को भेजा जाता है। मुंबई क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, मुंबई में सिर्फ तीन-चार डिस्ट्रिब्यूटर्स को ही इस इंजेक्शन को बेचने का लाइसेंस मिला है। उसमें भी बहुत कड़ी शर्तें हैं, जैसे किसी डॉक्टर की सिफारिश, आधार कार्ड की डिटेल आदि। लेकिन इस इंजेक्शन की कालाबाजारी से जुड़े लोग बिना किसी शर्त के यह दवा बेच रहे हैं, क्योंकि उसमें मोटी कमाई होती है। 


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