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मुंबई : कोरोना के फैलते संक्रमण के कारण मरीजों और उनके परिजन को किस कदर परेशान होना पड़ रहा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक मरीज के घर कॉल करने के 6 घंटे बाद एम्बुलेंस पहुंची। इतना ही नहीं, मरीज को अस्पताल में भर्ती करने में 18 घंटे से अधिक लग गए और भर्ती होने के कुछ ही घंटों बाद मरीज की मौत हो गई। वकोला में रहने वाले सुरेश चह्वाण (बदला हुआ नाम) के भाई सचिन चह्वाण बताते हैं कि 10 मई को उनके भाई को बुखार आया था, जिसके बाद वह पास के एक डॉक्टर को दिखा कर दवा लेकर घर आ गए। दवा से उन्हें आराम नहीं हुआ और बुखार के साथ बदन दर्द और सांस लेने में तकलीफ भी होने लगी। नतीजतन बुधवार को उन्हें वी. एन. देसाई अस्पताल ले गए, जहां छाती का एक्सरे करने पर मरीज में निमोनिया की शिकायत की बात सामने आई। अस्पताल ने उन्हें आग के इलाज के लिए कूपर अस्पताल भेज दिया।

मरीज के भाई सचिन ने बताया कि दो दिन बाद शुक्रवार को कोविड की रिपोर्ट आई जिसमें कोरोना की पुष्टि थी। रिपोर्ट आने के बाद शाम के 6 बजे बीएमसी की हेल्पलाइन नंबर 1916 पर कॉल कर सब कुछ बताया। आखिरकार रात के 12.30 बजे एम्बुलेंस आई और हम मरीज को लेकर गुरुनानक अस्पताल गए, जहां डॉक्टरों ने रिपोर्ट और मरीज को देखने के कहा कि इन्हें ICU की जरूरत है, इसलिए हम सेवेन हिल्स अस्पताल जाएं। सेवन हिल्स में घंटों इंतजार करने के बाद भी बेड नहीं मिला। मृतक के भाई ने कहा, 'भाई की स्थिति बिगड़ती देख हमने कुछ नेताओं को कॉल किया। इसके बाद बीएमसी के ट्रॉमा सेंटर में हमें 18 घंटे बाद बेड मिला। शुक्रवार की रात करीब 12 बजे हमें कॉल आया कि मरीज की स्थिति बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। अगर समय पर मेरे भाई को बेड मिल जाता, तो शायद आज वह हम लोगों के बीच होता।'


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