मुंबई : गांव में भी मजदूरों को सता रही भूख
मुंबई : भुखमरी के डर से मुंबई छोड़ने को मजबूर हुए मजदूरों का मुलुक में भी भूख पीछा नहीं छोड़ नहीं रही है. महामारी कोरोना के चलते लगाए गए लॉकडाउन से तंग आकर गांव जाने की जिद ने लोगों को ऐसा ही कटु अनुभव कराया है कि उन्हें अपने और पराये में अंतर करना मुश्किल लग रहा है। जिस स्वछंदता की उम्मीद में गांव जाने के लिए उत्तरभारतीय मुंबई से उतावले दिख रहे थे उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की बदहाल व्यवस्था ने व्यथित कर दिया है.
वसई से जौनपुर के लिए छोड़ी गई श्रमिक विशेष ट्रेन जब मंगलवार सुबह 3 बजे जौनपुर पहुंची तो जन्मभूमि के स्पर्श ने यात्रियों के मन में जिस रोमांच की अनुभूति उत्पन्न की थी वह उस समय काफूर हो गयी जब 100 से अधिक लोगों को मड़ियाहूं स्थित स्वामी विवेकानंद इंटरमीडिएट कॉलेज के परिसर में सामूहिक रूप से बिना किसी पर्याप्त सुविधा के ठहरा दिया गया. इस विद्यालय में कोरेन्टीन एक पीड़ित ने बताया कि सुबह लगभग 8 बजे चाय देने के बाद दोपहर खिचड़ी का एक पैकेट पकड़ा दिया गया. जबकि छोटे-छोटे बच्चे दूध के लिए तरस रहे थे.
पीड़ित के अनुसार प्रशासन द्वारा समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोग दिन भर परेशान रहे. भूख प्यास और गर्मी से बेहाल लोगों ने सोशल मीडिया समेत अन्य माध्यमों से जब शोर मचाया तब पानी का टैंकर उपलब्ध कराया गया. शाम सात बजे के बाद प्रशासन हरकत में आया. तब जाकर भूख से रोते बिलखते बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था हुई. लोग अपने आपको कोसते नजर आए, लोगों का कहना था इससे बेहतर तो मुंबई में ही थे. इस संबंध में जौनपुर के जिलाधिकारी दिनेश प्रताप सिंह से प्रतिक्रिया जानने के लिए संपर्क किया गया पर उनसे संपर्क नहीं हो सका. सभी की मांग थी कि उन सभी को उनके गांव में कोरेन्टीन किया जाय.
दूसरी ओर चुनाव को लेकर स्वार्थ की राजनीति शुरू हो गई है. अगले साल यूपी में संभावित ग्राम पंचायत के चुनाव के चलते गांव पहुंचे यात्रियों को वर्तमान और भावी प्रधान ने उनके स्वागत में पलक पांवड़े बिछा दिए हैं. प्रधान पद के संभावित उम्मीदवार भी गांव के बाहर कोरंटाईन लोगों की आवभगत में जुट गए हैं. मुंबई से बाइक से जौनपुर पहुंचे अपने अढ़नपुर गांव में कोरेन्टीन जगदीश सिंह ने बताया कि भले ही प्रशासनिक अधिकारी सरकार के साथ फेल हो रहे हैं, लेकिन वर्तमान और भावी प्रधान कृपा पाने के लिए कृपा की बरसात कर रहे हैं. गांव के स्कूल में बने कोरेन्टीन सेंटर में ठहरने और भोजन की उत्तम व्यवस्था है.