नागपुर : विश्वविद्यालय को हाईकोर्ट का झटका
नागपुर : बार काउंसिल आफ इंडिया द्वारा निर्धारित किए गए नए नियमों के अनुसार नागपुर विश्वविद्यालय के डा. बाबासाहब आम्बेडकर लॉ कालेज को नए सिरे से मान्यता लेने की आवश्यकता होने के बावजूद मान्यता लेने की बजाय, नए नियमों को चुनौती देते हुए विवि की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई. याचिका पर लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने विवि की याचिका को ठुकरा दिया. साथ ही बार काउंसिल आफ इंडिया द्वारा लिए गए फैसले को सही करार दिया. उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद अब विवि के लॉ कालेज को वर्ष 2011 से उसके बाद के सभी 3 वर्ष के पाठ्यक्रम की डिग्री के लिए बार काउंसिल आफ इंडिया से मान्यता प्राप्त करनी होगी. इसके अलावा उसके आगे के पाठ्यक्रम के लिए भी मान्यता लेना अनिवार्य होगा.
मध्य भारत के सबसे पुराने विवि लॉ कालेज को 1995 में बार काउंसिल आफ इंडिया की ओर से स्थायी तौर पर मान्यता प्रदान की गई थी, जिससे अब भले ही नए नियम निर्धारित किए गए हों, लेकिन नागपुर विवि लॉ कालेज को मान्यता लेने की आवश्यकता नहीं होने का दावा याचिकाकर्ता की ओर से किया गया. याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील का मानना था कि कोई भी नियम निर्धारित हो, लेकिन उसे पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता है. नए नियमों को केवल भविष्य के लिए ही लागू किया जा सकता है, जिसके लिए याचिकाकर्ता की ओर से अन्य हाईकोर्ट द्वारा ऐसे मामलों में दिए फैसले का हवाला भी दिया गया. बार काउंसिल आफ इंडिया द्वारा देश के प्रत्येक विधि महाविद्यालय को हर 5 वर्षों में मान्यता लेना बंधनकारक किया गया.
बार काउंसिल आफ इंडिया द्वारा मान्यता लेने के लिए किए गए पत्राचार के बाद विवि की ओर से समय-समय पर वर्ष 2010 में लगभग 26 लाख रु. बार काउंसिल आफ इंडिया के पास जमा किए थे. मान्यता नहीं लेने पर बार काउंसिल आफ गोवा एंड महाराष्ट्र ने विधि के स्नातकों को सनद देने से इंकार किया था. गत सुनवाई के दौरान अदालत ने अंतरिम आदेश देकर याचिका का फैसला होने तक कालेज के स्नातकों को संरक्षण प्रदान किया था, लेकिन अब याचिका ठुकराए जाने से गत काल की कक्षाओं के लिए मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य हो गया है.