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मुंबई : मध्य प्रदेश में हालिया सियासी उलटफेर ने बीजेपी को नई ऊर्जा दे दी है। खासकर, महाराष्ट्र बीजेपी नेताओं में नया उत्साह पैदा हो गया है। वहीं कांग्रेस खेमे में निराशा छाई हुई है। बीजेपी को लगता है कि जल्द ही उनके 'अच्छे दिन' आने वाले हैं, वहीं कांग्रेस को लगता है कि मध्यप्र देश की राजनीति का महाराष्ट्र पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार सुरक्षित है। महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार तीन दलों की सरकार है, जिसकी अलग-अलग विचारधारा है। तीनों को एक प्लैटफॉर्म पर लाने में एनसीपी प्रमुख शरद पवार की बड़ी भूमिका थी, लेकिन शिवसेना को पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से 'ऐलर्जी' है। पवार को इस बात का डर है कि बीजेपी कहीं फडणवीस को राज्य की राजनीति से अलग न कर दे। इससे एक बार फिर शिवसेना और बीजेपी करीब आ सकते हैं और इसी से ही एनसीपी-शिवसेना-कांग्रेस सरकार को खतरा पैदा हो जाएगा। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर आए संकट ने महाराष्ट्र की राजनीति पर भी सवाल उठा दिए हैं। 

महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में भले ही कांग्रेस शामिल हो, लेकिन कांग्रेस के कई सारे विधायक अपनी सरकार से खुश नहीं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण कई बार ठाकरे सरकार के खिलाफ मुखर होकर बोलते नजर आए हैं। शुक्रवार को अपनी सरकार के बजट पर पृथ्वीराज चव्हाण ने आगे आकर सवाल किया कि बजट में रोजगार बढ़ाने के लिए क्या किया गया है? ऐसे कई सारे अवसर पर पृथ्वीराज चव्हाण सरकार के खिलाफ बोलते रहे हैं। उनका साथ कांग्रेस खेमे में कई सारे विधायक व नेता भी दे रहे हैं। हालांकि कांग्रेस कोटे से जो मंत्री बनाए गए हैं, वे भी दबे स्वर में ठाकरे सरकार के खिलाफ बोलते हैं।


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