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मुंबई: हादसे के 18 दिन बाद भी ठीक-ठीक पता नहीं चला सका है कि केईएम अस्पताल के आईसीयू जैसी संवेदनशील जगह पर आग कैसे लगी और प्रिंस कैसे झुलसा। परिजन उसके दिल का इलाज कराने लाए थे, जिसका इलाज ठीक से शुरू भी नहीं हुआ कि यह आफत टूट पड़ी। झुलसने के 15 दिन बाद अंतत: प्रिंस की मौत हो गई। बीएमसी ने प्रिंस के परिजन को 10 लाख रुपये का मुआवजा जरूर दिया, लेकिन इससे न तो मां-पिता की पीड़ा कम होगी और न अस्पताल की लापरवाही को ढंका जा सकेगा। मौत के तीन दिन बाद परिवार वालों ने प्रिंस का भोईवाडा स्थित श्मशान भूमि पर अंतिम संस्कार कर दिया।

प्रिंस के पापा पन्नेलाल राजभर उत्तर प्रदेश से अपनी पत्नी के साथ प्रिंस के दिल का इलाज कराने के लिए मुंबई आए थे, लेकिन उपचार तो मिलने से रहा और उसके पहले ही अस्पताल में लगी आग ने सबकुछ खत्म कर दिया। बता दें कि जलने और शरीर के आंतरिक हिस्से में संक्रमण फैलने के कारण शुक्रवार तड़के प्रिंस की मौत हो गई थी, लेकिन परिवार वालों ने सोमवार को अंतिम संस्कार कर दिया। पन्नेलाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश से उनके कुछ करीबी रिश्तेदार आ रहे थे, जिसके कारण अंतिम संस्कार के लिए सोमवार तक रुकना पड़ा। प्रिंस की बॉडी लेने से पहले अस्पताल प्रशासन ने हमें 5-5 लाख रुपये के दो चेक दिए। 

कब क्या हुआ

5 नवंबर को दिल में छेद के इलाज के लिए प्रिंस को केईएम अस्पताल में भर्ती किया गया

7 नवंबर को अस्पताल के आईसीयू में लगी आग, इसमें प्रिंस 22 प्रतिशत तक झुलस गया

11 नवंबर को झुलसने के कारण प्रिंस का बायां हाथ कोहनी से काटकर अलग किया गया

16 नवंबर को चौतरफा विरोध के बाद बीएमसी ने 5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की

19 नवंबर को प्रिंस की स्थिति बिगड़ने लगी, ब्लड प्रेशर के साथ दूसरे पैरामीटर भी गिरने लगे

20 नवंबर को निमोनिया फैलने के कारण केईएम के डॉक्टरों ने प्रिंस का किया छोटा-सा ऑपरेशन

22 नवंबर को प्रिंस की स्थिति बिगड़ने लगी और शुक्रवार तड़के प्रिंस की मौत हो गई

22 नवंबर को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, जलने और संक्रमण फैलने के कारण प्रिंस की हुई मौत

25 नवंबर को भोईवाडा श्मशान भूमि में प्रिंस का किया गया अंतिम संस्कार


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