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मुंबई : महाराष्ट्र में बीते शनिवार को जब देवेंद्र फडणवीस ने अचानक सीएम पद की शपथ ली और उनके साथ अजित पवार डेप्युटी सीएम बने तो एनसीपी के 15 विधायक लापता पाए गए। आशंका थी कि इन सभी ने एनसीपी की बजाय बीजेपी का साथ देने का फैसला लिया है। लेकिन, इस झटके से उबरने के लिए जब विपक्ष ने कोशिशें शुरू कीं तो एक-एक विधायक को महाराष्ट्र से लेकर गुरुग्राम तक से खोज लाए। कुछ विधायकों को फ्लाइट से गुड़गांव ले जाया गया था तो कुछ अज्ञात स्थानों पर थे। कई विधायक हालांकि लौट आए थे, लेकिन कई लोगों के लिए एनसीपी ने सर्च ऐंड रेस्क्यू ऑपरेशन ही छेड़ दिया था। अब इन सभी विधायकों पर हर पल नजर रखी जा रही है और यहां तक कि हर तीन घंटे में उनकी हाजिरी ली जा रही है। आइए जानते हैं कैसे चला यह पूरा सर्च ऑपरेशन और मिलने पर क्या बोले विधायक...

एनसीपी के जिन विधायकों ने दिल्ली की फ्लाइट पकड़ी थी, उनमें से एक दौलत दरोडा भी थे। कहा जा रहा है कि उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट से गुरुग्राम ले जाया गया था और वहां बीजेपी वर्कर्स और ऐक्टिविस्ट्स की निगरानी में एक होटल में रखा गया था। एनसीपी कैंप में वापस लौटने पर दरोडा ने कहा, 'हमें जब दिल्ली ले जाया जा रहा था तो कहा गया कि एनसीपी ने बीजेपी का आधिकारिक तौर पर समर्थन किया है। लेकिन बाद में हमें पता चला कि एनसीपी बीजेपी का समर्थन नहीं कर रही।' उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के होटल में हमारा फोन भी ले लिया गया था, लेकिन किसी तरह से शरद पवार से हम संपर्क कर सके। इसके बाद उन्होंने हमें वहां से निकालने के लिए प्रयास शुरू किए।

एनसीपी के संजय बंसोडे उन विधायकों में से थे, जिन्हें शिवसैनिक एयरपोर्ट से पकड़कर रविवार को वाईबी चौहान सेंटर लाए थे। यहां शिवेसना और एनसीपी की मीटिंग चल रही थी। शिवसेना के एक नेता ने बंसोडे को पकड़कर लाने की दिलचस्प कहानी बताते हुए कहा कि शरद पवार ने उद्धव ठाकरे के पीए मिलिंद नार्वेकर को फोन किया था। उन्होंने कहा कि बंसोडे को सहारा स्टार में रखा गया है और वह वापस लौटना चाहते हैं। इसके बाद मिलिंद और शिवसेना के लीडर एकनाथ शिंदे होटल पहुंचे। पहले अकेले मिलिंद ही गए और वहां देखा कि 40 पुलिसवाले खड़े हैं और बीजेपी नेता मोहित कांबोज भी मौजूद थे। कुछ ही देर में अपने कई समर्थकों के साथ एकनाथ शिंदे भी मौके पर पहुंचे। बंसोडे से संपर्क किया गया और वह लॉबी में आए। इसी दौरान मिलिंद और शिंदे से पुलिस और बीजेपी के कार्यकर्ता बहस करने लगे। इसी दौरान शिवसैनिक बंसोडे को लेकर निकल गए। 

धनंजय मुंडे के लिए कहा जा रहा है कि अजित पवार के लिए उन्होंने ही विधायकों को जुटाया था। लेकिन वापस शरद पवार खेमे में आने वाले धनंजय मुंडे अलग ही कहानी बताते हैं। वह कहते हैं कि 23 नवंबर को मैं अपने बंगले पर नहीं था और दोपहर एक बजे तक सोता रहा। इसी वजह से मेरा फोन नहीं लग रहा था। शनिवार को ही वाईबी चौहान सेंटर में उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने उनसे लंबी बातचीत की गई थी। डिंडोरी के विधायक नरहरी जिरवाल भी उनमें से एक हैं, जिन्हें गुरुगाम से मुंबई लाया गया। एनसीपी की युवा नेता सोनिया दूहन और धीरज शर्मा ने इन्हें निकालने का काम किया था। जिरवाल के अलावा खानपुर के विधायक दौलत दरोडा, अनिल पाटील और कलवान के नितिन पवार भी गुरुग्राम के होटल में ही थे। जिरवाल ने कहा कि हमें न सिर्फ भ्रमित किया गया बल्कि एक तरह से किडनैप करके रखा गया। उन्होंने कहा कि हमारी 300 लोग निगरानी कर रहे थे, लेकिन पीछे के रास्ते से किसी तरह बाहर निकले। 

गुरुग्राम के ओबेरॉय होटल में रखे गए अनिल पाटील ने बताया कि वह अजित पवार की शपथ में गए थे। सेरेमनी के बाद मैंने सोचा कि एनसीपी बीजेपी के साथ सरकार बना रही है और अजित पवार का नेता के तौर पर हमने साथ दिया। इसके बाद हमें कहा गया कि सरकार गठन तक हमें कहीं और जाना होगा। लेकिन, जब हम गुरुग्राम पहुंचे और टीवी देखा तो सच पता चला। बाबासाहेब पाटील ने कहा कि उन्हें पहले राजभवन ले जाया गया था और उसके बाद तीन अन्य विधायकों के साथ दिल्ली लाया गया। अजित पवार क्या कर रहे हैं, इसका पता मुझे तब चला जब हम दिल्ली पहुंचे और अपना फोन ऑन किया। इसके बाद किसी तरह हमने शरद पवार से संपर्क किया और उन्होंने हमें निकाला।

एनसीपी विधायक नितिन पवार के परिवार ने तो उनके लापता होने की भी शिकायत दर्ज करा दी थी। हरियाणा से एनसीपी के यूथ विंग के कार्यकर्ताओं ने उन्हें निकालने का काम किया। शरद पवार कैंप में लौटने के बाद उन्होंने कहा, 'मैं शरद पवार का समर्थन करता हूं और इसमें कोई संदेह नहीं है। राजेंद्र सिंगणे ने बताया कि उन्हें गुरुवार रात को अजित पवार ने कॉल किया था। उन्होंने अगले दिन धनंजय मुंडे के बंगले पर पहुंचने को कहा है और कहा कि जरूरी मसले पर बात करनी है। मैं शनिवार को सुबह 7 बजे वहां पहुंचा और वहां 8 से 10 विधायक पहले से थे। इसके बाद हमें गवर्नर हाउस ले जाया गया, लेकिन कुछ नहीं बताया गया। जब तक हम कोई फैसला ले पाते, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार शपथ ले चुके थे। शनिवार को राजभवन में हुई शपथ में मौजूद रहे माणिकराव कोकाटे कई घंटों तक गायब रहे। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर मेसेज जारी किया और रविवार को होटल रेनेसां में पहुंचे, जहां एनसीपी के लोग ठहरे हुए थे। उन्होंने कहा कि अजित पवार विधायक दल के नेता थे और मैंने उनकी बात मानी। मुझे कुछ भी अंदाजा नहीं था कि वह क्या करने जा रहे हैं।

संदीप क्षीरसागर ने कहा, 'अजित पवार ने मुझे धनंजय मुंडे के बंगले पर बुलाया था, जिस दिन शपथ समारोह था। मैं वहां गया, लेकिन अजित पवार और मुंडे नहीं थे। मुझे कार में बैठने को कहा गया और राजभवन ले जाया गया।' सेरेमनी देखने के बाद मैंने महसूस किया कि कुछ गलत हो गया है। लेकिन, मुझे जाने नहीं दिया गया। किसी तरह मैं वहां से निकला और फिर वाईबी चौहान सेंटर पहुंचा, जहां शरद पवार और अन्य सीनियर लीडर मौजूद थे।

मजलगांव के विधायक प्रकाश सोलंकी ने हालांकि अलग ही कहानी बताई। उन्होंने कहा कि मैं शपथ में गया था, लेकिन फिर रेनेसां होटल आया और शरद पवार का सपॉर्ट किया। वह अजित पवार के साथ जाने की बात से इनकार करते हुए कहते हैं कि मेरी ओर से उनको समर्थन की सिर्फ अफवाह फैलाई गई थी। कुछ ऐसा ही कहना एनसीपी के विधायक दिलीपराव बानकर का। कांग्रेस के नाना पटोले और एनसीपी के जितेंद्र अव्हाड किसी तरह उन्हें दिल्ली से वापस लेकर आए थे। शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने वालों में तीन विधायकों के नाम सुनील थे। ये थे सुनील शेलके, सुनील टिंगरे और सुनील भुसारा। तीनों नेताओं ने कहा कि हम बागी नहीं थे, हमें अजित पवार ने बुलाया था और उन्हें अपना नेता मानते हुए पहुंचे थे। हम अब भी एनसीपी में ही हैं और शरद पवार जी के नेतृत्व पर भरोसा रखते हैं।


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